छठ महापर्व के दूसरे दिन कुछ वृत्तियों द्वारा भीख मांग कर की जाती है पूजा

बलरामपुर। लोक आस्था का महापर्व छठ शुरू हो गया है। इस पर्व का समापन 20 नवंबर को होगा। चार दिनों तक चलने वाले छठ पूजा के पहले दिन नहाय-खाय, दूसरे दिन आज खरना के रूप में मनाया जाता है, तीसरे दिन संध्या अर्घ्य और चौथे दिन उषा अर्घ्य देते हुए समापन होता है। छठ महापर्व सूर्य उपासना का सबसे बड़ा त्योहार होता है। इस पर्व में भगवान सूर्य के साथ छठी माई की पूजा-उपासना विधि-विधान के साथ की जाती है। यह सबसे कठिन व्रतों में से एक माना जाता है। इस पर्व में आस्था रखने वाले लोग सालभर इसका इंतजार करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि छठ का व्रत संतान प्राप्ति की कामना, संतान की कुशलता, सुख-समृद्धि और उसकी दीर्घायु के लिए किया जाता है।

छठ पूजा के दौरान सूर्यदेव और छठी मैया की पूजा की जाती है। इस पूजा में भक्त गंगा नदी जैसे पवित्र जल में स्नान करते हैं। महिलाएं निर्जला व्रत रखकर सूर्य देव और छठी माता के लिए प्रसाद तैयार करते हैं। दूसरे और तीसरे दिन को खरना और छठ पूजा कहा जाता है। महिलाएं इन दिनों एक कठिन निर्जला व्रत रखती हैं। साथ ही चौथे दिन महिलाएं पानी में खड़े होकर उगते सूरज को अर्घ्य देती हैं और फिर व्रत का पारण करती हैं।

इसी क्रम में बलरामपुर जिले में वृत्तियों द्वारा खरना पर्व के दिन गांव में घूम भीख मांगने का चलन है, जिसमें कुछ वृत्तियों द्वारा आज के दिन घर-घर जा भीख मांगा जाता है, फिर महापर्व के दिन उस से प्रसाद बना छठ पूजा किया जाता है, बलरामपुर जिले में इसके लिए काफी उत्साह देखा जा रहा है, बाजारों में भी चहल पहल छा गया है, साथ ही बलरामपुर जिले के मुख्य तट कनहर नदी में घाट बनना शुरू हो गया है। इसके साथ ही स्थानीय नदी नालों कुआं वैगरह में भी वर्तियो द्वारा छठ पूजा किया जाता है l

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