अब खसरा नंबर पर होगी जांच, भारतमाला मुआवजा घोटाले में दो विशेष टीमें गठन
Now investigation will be done on Khasra number, two special teams formed in Bharatmala compensation scam

रायपुर। भारतमाला प्रोजेक्ट में हुए करोड़ों के मुआवजा घोटाले की जांच जहां ईडी ने तेज कर दी है, वहीं इसे लेकर प्रशासन ने भी अब तक का सबसे बड़ा कदम उठाया है। रायपुर के संभाग आयुक्त महादेव कांवरे ने रायपुर-विशाखापत्तनम कारिडोर मामले की तह तक जाने के लिए आला अफसरों की दो नई विशेष टीमें गठित की हैं। इस बार जांच का दायरा केवल शिकायतों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि प्रोजेक्ट के दायरे में आने वाले एक-एक खसरा नंबर की बारीकी से स्क्रूटनी की जाएगी। संभाग आयुक्त द्वारा जारी आदेश के मुताबिक, जांच को दो हिस्सों में बांटा गया है। रायपुर जिले की जांच डिप्टी कलेक्टर ज्योति सिंह के नेतृत्व वाली टीम करेगी जबकि धमतरी जिले की कमान अपर कलेक्टर पवन कुमार की टीम को सौंपी गई है।
इससे पहले हुई तीन जांचों में केवल उन्हीं जमीनों को खंगाला गया था, जिनकी शिकायतें प्राप्त हुई थीं। हालांकि, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की हालिया कार्रवाई और आइएएस सहित कई बड़े अधिकारियों की घोटाले में संलिप्तता उजागर होने के बाद प्रशासन ने रणनीति बदल दी है। अब उन खसरा नंबरों की भी जांच होगी, जिन पर कोई विवाद नहीं था, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि मुआवजा वितरण में कहीं भी अपात्रों को लाभ तो नहीं पहुंचाया गया।
कमिश्नर ने दोनों टीमों को एक महीने के भीतर विस्तृत रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं। यह रिपोर्ट सरकार के पास भेजी जाएगी। वर्तमान में डिप्टी कलेक्टर निर्भय कुमार साहू और शशिकांत कुर्रे समेत दस लोगों की गिरफ्तारी के बाद कयास लगाए जा रहे हैं कि इस नई जांच रिपोर्ट के आधार पर तत्कालीन कलेक्टर, कई एसडीएम, डिप्टी कलेक्टर, तहसीलदार और रसूखदारो पर कार्रवाई की गाज गिर सकती है। सरकार का स्पष्ट रुख है कि भ्रष्टाचार में संलिप्त किसी भी कर्मचारी को बख्शा नहीं जाएगा।
ईडी की जांच में यह घोटाला 100 करोड़ रुपये के पार गया है। पहले 32 करोड़ का घोटाला सामने आया था। जब इसका दायरा रायपुर जिले से बढ़ते हुए 11 जिलों तक फैला तो साफ हुआ है कि जमीन अधिग्रहण की जानकारी पहले ही तत्कालीन राजस्व अफसरों ने रसूखदारों,सत्ता व विपक्ष के नेताओं को लीक कर दी गई थी। इसके बाद रसूखदारों ने औने-पौने दाम पर जमीन खरीदकर राजस्व अधिकारियों से कागजों में हेरफेर कराया। फिर कई गुना तक मुआवजा बढ़वाकर करोड़ों रुपये का बंदरबाट कर लिया। इन जिलों के तत्कालीन कलेक्टर अब ईडी के रडार पर हैं।



