छत्तीसगढ़

कांग्रेस संगठन की बड़ी जिम्मेदारी अब एक ऐसे चेहरे को मिली है

Now a big responsibility of the Congress organization has been given to such a face.

देवीचरण ठाकुर गरियाबंद 

गरियाबंद _ कांग्रेस संगठन की बड़ी जिम्मेदारी अब एक ऐसे चेहरे को मिली है, जो भीड़ नहीं — कर्मठता, समर्पण और संगठन के प्रति निष्ठा के आधार पर चुना गया। 48 वर्षीय युवा नेता सुखचंद बेसरा जिला अध्यक्ष के सभी मापदंडों पर खरे उतरे हैं।

25 साल से संगठन का मजबूत स्तंभ बने रहे सुखचंद बेसरा

छात्र जीवन से ही कांग्रेस से जुड़े सुखचंद बेसरा ने संगठन में ब्लॉक से लेकर जिले तक कई महत्वपूर्ण दायित्वों का निर्वहन किया है। पूर्व सीएम भूपेश बघेल के करीबी माने जाने के बावजूद उन्होंने रायसुमारी प्रक्रिया में भीड़ जुटाने जैसे हथकंडों से दूरी बनाए रखी और अपनी कर्मठता पर भरोसा किया।

कांग्रेस ने जारी की जिला अध्यक्षों की सूची — तीसरे पायदान से शीर्ष पर पहुंचे बेसरा

कांग्रेस द्वारा आज जारी सूची में गरियाबंद-अभनपुर जिले के अध्यक्ष पद पर सुखचंद बेसरा की नियुक्ति कई मायनों में खास है। तीन संभावित नामों में तीसरे पायदान में गिने जा रहे बेसरा का चयन संगठन के भीतर “समर्पण और निष्ठा महत्त्वपूर्ण” होने का स्पष्ट संदेश देता है।

सादगी से शुरू हुई राजनीतिक यात्रा — समर्पण ने दिलाई पहचान

देवभोग ब्लॉक के दरलीपारा गांव में 7 फरवरी 1977 को जन्मे सुखचंद बेसरा 1993 में छात्र जीवन में ही कांग्रेस के सक्रिय सदस्य बने। दरी बिछाने और झंडा उठाने से शुरू हुई उनकी यात्रा 2001 में देवभोग ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष बनने तक पहुंची।

मुख्य पड़ाव —

2001 : देवभोग ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष

2006 : रायपुर ग्रामीण जिला युवा कांग्रेस महामंत्री

2007-2009 : संसद प्रतिनिधि (अजीत जोगी के करीबी होने का फायदा)

2008 : ब्लॉक कांग्रेस कमेटी महामंत्री

2015-2021 : दोबारा ब्लॉक अध्यक्ष

2021-2025 : जिला कांग्रेस कमेटी उपाध्यक्ष

सुखचंद बेसरा न सिर्फ संगठन में बल्कि जनप्रतिनिधि के रूप में भी सक्रिय रहे_ वे तीन बार सरपंच और देवभोग जनपद पंचायत के उपाध्यक्ष भी रह चुके हैं।

भीड़ ने नाम नहीं लिया, लेकिन कार्यकर्ताओं ने छोड़ा नहीं_ रायसुमारी में उभरे सबसे भरोसेमंद चेहरा

जिला अध्यक्ष के दावेदारों में सबसे आगे पूर्व CM श्यामाचरण शुक्ल परिवार के सदस्य (अमितेश शुक्ल के सुपुत्र) और क्षेत्रीय विधायक समर्थित युगल पांडेय माने जा रहे थे। दोनों पक्षों ने भारी भीड़ भी जुटाई, लेकिन सुखचंद बेसरा इस दौड़ में पीछे दिखाई दे रहे थे।

पर रायसुमारी का नज़रिया अलग निकला—

भीड़ का नाम चाहे न आया हो, लेकिन कार्यकर्ताओं की टॉप-3 पसंद में हर बार सुखचंद बेसरा का नाम मौजूद था।प्रवेक्षकों ने भीड़ के दबाव के बजाय कार्यकर्ताओं की वास्तविक राय को महत्व देते हुए सुखचंद बेसरा के नाम पर मुहर लगा दी।

संगठन ने दिया ‘समर्पण को प्राथमिकता’ का संदेश

सुखचंद बेसरा की नियुक्ति से कांग्रेस ने यह साफ संदेश दिया है कि_ “भीड़ नहीं, संगठन के प्रति वफादारी और निरंतर कार्य ही नेतृत्व तय करेगा।”

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