1 अप्रैल से लागू होगा नया नियम, कूड़ा चार हिस्सों में अलग करना जरूरी
New rules will come into effect from April 1, requiring waste segregation into four parts.

रायपुर। एक अप्रैल से ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (संशोधन) नियम लागू होने जा रहे हैं, जो शहर की स्वच्छता रैंकिंग के लिए “अग्निपरीक्षा” से कम नहीं होगा। नए नियमों के मुताबिक अब गीला और सूखा कचरा ही नहीं, बल्कि बायो-मेडिकल (सेनेटरी) और खतरनाक कचरे को भी अलग-अलग करके चार डिब्बों में देना अनिवार्य होगा।
लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि रायपुर नगर निगम का मौजूदा ढांचा इस डिजिटल विजन के सामने पुराना नजर आ रहा है। वर्तमान में निगम के पास मौजूद 255 कचरा कलेक्शन वाहनों में से अधिकांश में चार श्रेणियों के लिए जगह ही नहीं है।
बिना संसाधनों के नए नियम का पालन चुनौती पूर्ण
वहीं शहर में अब तक शत-प्रतिशत “सोर्स सेग्रीगेशन” (घर से कचरा अलग करना) का लक्ष्य भी पूरा नहीं हो पाया है। ऐसे में बिना संसाधनों के नए नियम का पालन बेहद चुनौती पूर्ण है। अब तक इसके लिए निगम में कोई तैयारी नहीं की गई है।
निगम पर इस बदलाव के लिए 15 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय बोझ आने का अनुमान है, जो पहले से ही बजट की कमी से जूझ रहे निगम प्रशासन के लिए आसान नहीं है।
करोड़ों का “कचरा बजट” की चुनौतियां
निगम ने स्वच्छता पर करोड़ों खर्च किए हैं, लेकिन चार बिन सिस्टम के लिए आवश्यक इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे कि सेकेंडरी ट्रांसफर स्टेशन पर अलग-अलग छंटनी की व्यवस्था के लिए निवेश की जरूरत है। अनुमान है कि गाड़ियों के अपग्रेडेशन, नए डस्टबिन के वितरण और आइटी आधारित मानिटरिंग सिस्टम पर निगम को करोड़ों रुपये से अधिक खर्च करने होंगे। बिना राज्य सरकार की विशेष ग्रांट के, निगम के लिए यह पहाड़ चढ़ने जैसा दुर्गम कार्य होगा।
वर्तमान में लगभग 255 गाड़ियां कचरा उठाने का काम कर रहीं
नगर निगम के बेड़े में वर्तमान में लगभग 255 गाड़ियां कचरा उठाने का काम कर रही हैं। ये गाड़ियां सभी तरह का कचरा एक साथ ले रही हैं। नए नियमों के तहत अब सेनेटरी और डोमेस्टिक हैजर्ड वेस्ट के लिए अलग बॉक्स के साथ कचरा चार तरह के बॉक्स में लेना होगा। ऐसे में पुराने तरीके से नए नियम का पालन कैसे पूरा होगा।
तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा गाड़ियों में पार्टिशन करने से उनकी क्षमता कम हो जाएगी, जिससे ट्रिप की संख्या बढ़ानी पड़ेगी। यदि निगम नई गाड़ियां खरीदता है तो एक गाड़ी की औसत कीमत छह से आठ लाख रुपये के बीच होती है, जो बजट को पटरी से उतार सकती है।
मिक्स कचरा ही डंपिंग यार्ड तक पहुंच रहा
स्वच्छता सर्वेक्षण के पुराने डेटा बताते हैं कि राजधानी के कई वार्डों में आज भी मिक्स कचरा ही डंपिंग यार्ड तक पहुंच रहा है। लोग नीले और हरे डिब्बे का अंतर तो समझ गए हैं। लेकिन लाल और काले डिब्बे (सेनेटरी और हैजर्ड वेस्ट) की अवधारणा अब भी कागजों तक सीमित है।
डायपर, सैनिटरी पैड, पुरानी दवाएं और बैटरी जैसे कचरे को अलग करने के लिए घर-घर जाकर प्रशिक्षण देना होगा। बिना जन-भागीदारी और सख्त जुर्माने के, यह चार बिन वाली योजना पूरी नहीं होगी।
नगरीय निकायों को बिना सूचना दिए नहीं बुला सकेंगे अधिक मेहमान
नगरीय निकायों को बिना सूचना दिए शादी, जन्मदिन या अन्य आयोजनों में 100 से अधिक मेहमान बुलाए जाने पर जुर्माना भरना पड़ेगा। छत्तीसगढ़ में एक अप्रैल से नई सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट पॉलिसी लागू होगी।
नए नियमों के मुताबिक यदि घर या किसी निजी स्थान पर शादी, जन्मदिन या इस तरह का कोई और समारोह करते हैं और 100 से अधिक लोग शामिल हो रहे हैं, तो आयोजन के तीन दिन पहले स्थानीय निगम या पालिका को इसकी लिखित सूचना देनी पड़ेगी।
एक अप्रैल से नए नियमों को लागू करने के लिए कार्ययोजना पर काम किया जाएगा। मौजूदा गाड़ियों को व्यवस्थित करने पर विचार कर संसाधनों के लिए शासन स्तर पर भी बात करेंगे।
-गायत्री सुनील चंद्राकर अध्यक्ष (स्वच्छता विभाग), नगर निगम, रायपुर


