छत्तीसगढ़

नादिया में संत सम्मेलन को मिलेगा 11 लाख रुपये प्रतिवर्ष, डोम और मिनी स्टेडियम बनेंगे – सीएम साय

Nadia saints' conference to receive Rs 11 lakh annually, dome and mini stadium to be built: CM Sai

राजनांदगांव। डोंगरगांव विकासखंड के कबीर मठ धाम नादिया (खुज्जी) में आयोजित अखिल भारतीय सद्गुरु कबीर संत सम्मेलन में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय शामिल हुए। फाल्गुन पूर्णिमा के अवसर पर आयोजित तीन दिवसीय सम्मेलन में देशभर से पहुंचे संतों का स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री ने प्रतिवर्ष आयोजन के लिए 11 लाख रुपये की स्वीकृति प्रदान की।

मुख्यमंत्री ने ग्राम नादिया में डोम और मिनी स्टेडियम निर्माण की घोषणा की। साथ ही राजनांदगांव में कबीर साहेब के नाम से प्रवेश द्वार बनाए जाने की घोषणा की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की 80 प्रतिशत आबादी कृषि पर निर्भर है। कृषक उन्नति योजना के तहत 25 लाख 28 हजार से अधिक पंजीकृत किसानों को लाभ दिया गया है। महतारी वंदन योजना के तहत 70 लाख से अधिक महिलाओं को प्रतिमाह एक हजार रुपये का भुगतान किया जा रहा है।

प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 18 लाख आवास स्वीकृत किए गए, जिनमें से 8 लाख से अधिक पूर्ण हो चुके हैं। उन्होंने तेंदूपत्ता, चरण पादुका, श्रीरामलला अयोध्या धाम दर्शन योजना और नवीन औद्योगिक नीति का उल्लेख करते हुए कहा कि युवाओं के रोजगार और आत्मनिर्भरता के लिए बेहतर अवसर सृजित किए जा रहे हैं। शीघ्र ही 500 शिक्षकों की भर्ती की जाएगी।

कार्यक्रम में प्रभारी मंत्री गजेन्द्र यादव ने कहा कि छत्तीसगढ़ की विविधता भरी संस्कृति का भाव कहीं अन्य देखने नहीं मिलता है। सांसद संतोष पांडे ने कहा कि भारत की भूमि संतों और महापुरुषों की रही है, जिन्होंने समाज को सत्य और धर्म का मार्ग दिखाया।

संत मंगतूराम ठाकुर के योगदान का उल्लेख करते हुए उन्होंने त्याग और सेवा की परंपरा को स्मरण किया। महापौर मधुसूदन यादव ने कहा कि संत कबीर ने समभाव और भाईचारे का संदेश दिया। उनके आदर्शों को घर-घर तक पहुंचाना आवश्यक है।

इस अवसर पर मंगल साहेब, संत गिरवर साहेब, साध्वी सुमेधा साहेब, संत डॉ हरीश दास, संत डॉ भागीरथी साहेब, संत रतनस्वरूप साहेब, लेखचंद साहेब उपस्थित थे।

कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष किरण वैष्णव, पुलिस महानिरीक्षक बालाजी राव सोमावार, कलेक्टर जितेंदर यादव, पुलिस अधीक्षक अंकिता शर्मा सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, अधिकारी और कबीर पंथ के अनुयायी शामिल रहे।

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