
रीवा में छात्र जीवन का किस्सा सुनाया। शिक्षकों को याद किया
रिपोर्टर : सुभाष मिश्रा
रीवा। रीवा लोकसभा से सांसद जनार्दन मिश्रा अपने बयानों से हमेशा चर्चा में बने रहते हैं। फिर उनका एक बयान सुर्खियों में बना हुआ है, जिसमें उन्होंने भरे मंच में कहा कि अगर आज मैं सांसद ना होता…. तो कहीं चाकू चला रहा होता….।
सांसद जनार्दन मिश्रा ने अपने छात्र जीवन का किस्सा सुनाया उन्होंने बताया कि छात्र जीवन में वै थोड़ा बिगड़ गए थे, अन्य छात्रों के साथ मारपीट करते थे और बीड़ी भी पीते थे। जिस वजह से उन्हें स्कूल से सस्पेंड कर दिया गया था, उन्होंने कहा कि उसे दौर में अगर शिक्षकों का साथ ना मिला होता तो वे आज संसद नहीं होते। बल्कि चाकू चलते घूम रहे होते।
रीवा जिले के मॉडल स्कूल का 50 व स्थापना दिवस था। इसी दौरान स्वर्ण जयंती समारोह के अवसर पर संसद ने अपने छात्र जीवन का किस्सा साझा करते हुए बयान दिया। समारोह मैं डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ला मुख्य अतिथि के तौर पर मौजूद थे तीसरी बार सांसद बने जोनाथन मिश्रा भी कार्यक्रम में शामिल हुए थे। उन्होंने लोगों को संबोधित करते हुए शिक्षक का महत्व बताने के लिए अपने छात्र जीवन को याद किया, अपने छात्र जीवन से जुड़े हुए कुछ-किस से भी सुनाएं।
उन्होंने कहा कि छात्र जीवन में भी बिगड़ गए थे, बीड़ी पीने की आदत हो गई थी लेकिन स्कूल के प्रिंसिपल सिद्दीकी और शिक्षक रामानुज द्विवेदी के कारण वह सुधर गए। एक बार स्कूल बीड़ी पी कर गए तो शिक्षक ने पकड़ लिया, तब 7 दिन के लिए स्कूल से सस्पेंड कर घर में बीड़ी पीने की शिकायत कर दी थी। मारपीट की शिकायत पर प्रिंसिपल सिद्दीकी ने उन्हें प्रिंसिपल कक्षा में 5 दिनों तक किताब पढ़ने की सजा दी थी, उन्होंने कहा कि मैं आज जो भी हूं उन्हीं की बदौलत हूं अगर कोई छात्र यह कहे कि आज जो है वह खुद के दम पर है तो उसकी यह बात गलत होगी। उसके पीछे शिक्षक का बड़ा योगदान है।
उन्होंने इस दौरान कहा कि शिक्षकों की गुटबाजी से ना तो छात्र का भला होता है और ना ही स्कूल का। छात्र और स्कूल का नाम तभी रोशन होगा जब गुटबाजी ना हो।



