सेल– भिलाई इस्पात संयंत्र के जवाहरलाल नेहरू चिकित्सालय एवं अनुसंधान केंद्र (जेएलएनएचआरसी) के एनेस्थीसियोलॉजी विभाग द्वारा “सेव अ लाइफ” पहल के अंतर्गत ओपीडी परिसर में 02 मार्च, 2026 को हैंड-ओनली सीपीसीआर (कार्डियो पल्मोनरी सेरेब्रल रीससिटेशन) कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस प्रशिक्षण सत्र में ओपीडी में उपस्थित रोगियों एवं उनके परिजनों को आकस्मिक हृदयाघात की स्थिति में तत्काल जीवनरक्षक सहायता प्रदान करने संबंधी आवश्यक जानकारी दी गई।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी प्रभारी (चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएँ) डॉ. विनीता द्विवेदी, मुख्य चिकित्सा अधिकारी (चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएँ) डॉ. कौशलेंद्र ठाकुर एवं डॉ. उदय कुमार के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य हृदयाघात जैसी आकस्मिक परिस्थितियों में चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध होने से पूर्व की महत्वपूर्ण अवधि के दौरान आम नागरिकों को त्वरित एवं प्रभावी जीवनरक्षक उपाय करने हेतु सक्षम बनाना था।
प्रशिक्षण सत्र का संचालन एनेस्थीसियोलॉजी विभाग की विशेषज्ञ टीम डॉ. जयिता सरकार, डॉ. अमित अग्रवाल एवं डॉ. शिखा अग्रवाल द्वारा किया गया। प्रशिक्षण सत्र में उपस्थित आमजन को सरल एवं प्रभावी जीवनरक्षक तकनीकों का व्यवहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया गया। प्रशिक्षकों द्वारा “पुश हार्ड, पुश फास्ट” सिद्धांत पर आधारित हैंड्स–ओनली सीपीआर की विधि का प्रदर्शन किया गया, जिससे बिना माउथ-टू-माउथ प्रक्रिया के भी त्वरित सहायता संभव हो सके। साथ ही, हृदय संबंधी आपात स्थिति की शीघ्र पहचान तथा तत्काल चिकित्सकीय सहायता बुलाने के महत्व पर भी प्रकाश डाला गया।
प्रशिक्षण सत्र के अंतर्गत मैनिकिन्स के माध्यम से उपस्थितजनों को व्यावहारिक अभ्यास कराया गया, जिसमें चिकित्सकीय स्टाफ ने व्यक्तिगत रूप से मार्गदर्शन प्रदान करते हुए सीने पर सही दबाव की जानकारी दी। इस प्रत्यक्ष सहभागिता से प्रतिभागियों में आत्मविश्वास का संचार हुआ और वे आपात स्थिति में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित हुए।
इस अवसर पर उपस्थित मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. उदय कुमार ने अपने उद्बोधन में कहा कि कहा कि हृदयाघात के दौरान प्रारंभिक क्षण ही जीवन रक्षक सिद्ध होते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में प्रशिक्षित आमजन की त्वरित एवं सही प्रतिक्रिया किसी व्यक्ति के जीवन को बचाने में निर्णायक भूमिका निभा सकती है। उन्होंने समाज में अधिकाधिक लोगों को सीपीसीआर प्रशिक्षण से जोड़ने और सामुदायिक आपातकालीन तैयारियों को सुदृढ़ करने का आह्वान किया।
इस कार्यक्रम के माध्यम से एनेस्थीसियोलॉजी विभाग केवल ऑपरेशन थियेटर तक सीमित न रहकर, जन समुदाय के बीच जाकर जनस्वास्थ्य के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को सशक्त कर रहा है। ओपीडी परिसर जैसे सार्वजनिक स्थल पर इस प्रकार के प्रशिक्षण के आयोजन पर अस्पताल प्रशासन ने कहा कि जेएलएनएचआरसी एक ऐसे समाज के निर्माण की दिशा में अग्रसर है, जहाँ कोई भी व्यक्ति—चाहे वह चिकित्सकीय पृष्ठभूमि से हो या नहीं—आपात स्थिति में जीवन बचाने में सक्षम बन सके।
