मध्यप्रदेश

जवा कॉलेज के भ्रष्टाचार पर विधायक दिव्यराज सिंह सख्त, विधानसभा में उठाया मुद्दा

MLA Divyaraj Singh strict on corruption in Jawa College, raised the issue in the Assembly

रीवा मप्र – रिपोर्टर सुभाष मिश्रा 

मध्यप्रदेश विधानसभा के शीतकालीन सत्र से पहले रीवा जिले के शासकीय बिस्मस मुंडा महाविद्यालय, जवा में पदस्थ प्रभारी प्राचार्य पर लगे गंभीर आरोपों का मामला अब प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है। भ्रष्टाचार, आर्थिक अनियमितता, शासकीय धन के दुरुपयोग और पद के दुरुपयोग जैसे आरोपों को लेकर विधायक दिव्यराज सिंह ने विधानसभा में तारांकित प्रश्न क्रमांक 157 के माध्यम से उच्च शिक्षा मंत्री से विस्तृत जवाब मांगा है।
विधायक सिंह ने प्रश्न में पूछा है कि क्या जवा महाविद्यालय के प्रभारी प्राचार्य पर लगे भ्रष्टाचार, धोखाधड़ी, आर्थिक अनियमितता और शासकीय धन के दुरुपयोग के आरोपों को लेकर विभागीय जांच संस्थित की गई है? यदि हां, तो जांच प्रतिवेदन के आधार पर अब तक क्या दंडात्मक कार्रवाई की गई है?
विधायक ने आगे यह भी जानना चाहा है कि जांच पूरी होने तक आरोपी प्राचार्य को पद पर बनाए रखने का कारण आखिर क्या है? साथ ही यह भी पूछा गया है कि जांच उपरांत यदि प्राचार्य दोषी सिद्ध होते हैं तो क्या उन्हें सेवा से पृथक (बर्खास्त) किया जाएगा, और यदि नहीं — तो इसके पीछे क्या कारण है तथा कार्रवाई किस समय-सीमा में संपन्न की जाएगी?
शिक्षा विभाग के ब्यूरो सूत्रों के अनुसार, जवा महाविद्यालय के शैक्षणिक परिसर में प्रशासनिक पारदर्शिता की कमी को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं। स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, आर्थिक लेन-देन, नियुक्तियों, खरीद प्रक्रियाओं और संस्था संचालन में पारदर्शिता की कमी जैसी शिकायतें लंबे समय से की जा रही हैं।
प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि इस तरह के मामलों में पूर्व में भी पद पर रहते हुए अधिकारियों की जांच लंबी खिंचती रही है, जिससे प्रक्रिया और भी जटिल हो जाती है। यही कारण है कि विधायक सिंह ने इस प्रकरण को विधानसभा में उठाते हुए विभागीय कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
इस संबंध में विभागीय उत्तर 1 दिसंबर 2025 के विधानसभा सत्र में दिए जाने की संभावना है। अब देखना यह होगा कि उच्च शिक्षा मंत्री इस पूरे मामले में क्या रुख अपनाते हैं और क्या दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई होती है या यह मामला भी फाइलों में दबा रह जाएगा।

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