शासकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्था में पब्लिक प्राइवेट पार्टनशिप के तहत मिले सरकारी सहयोग राशि का दुरुपयोग

Misuse of government grant funds received under a Public-Private Partnership (PPP) at a Government Industrial Training Institute (ITI)

लोकेश्वर सिन्हा, गरियाबंद

गरियाबंद के मैनपुर में संचालित शासकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्था में पब्लिक प्राइवेट पार्टनशिप के तहत मिले सरकारी सहयोग राशि का दुरुपयोग देखने को मिला। पीपीपी के तहत संस्थान को 2010 में केंद्रीय सरकार के प्रावधान के तहत ढाई करोड़ की सहयोग राशि दी गई। जिले में मैनपुर में संचालित आईटीआई वह पहली संस्थान है जहां संचालित 5 ट्रैड को अत्याधुनिक मशीनों से लैस कर संपूर्ण सुविधा दिलाने के उद्देश्य से पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप के तहत आर्थिक सहायता दी गई थी। राशि खर्च के लिए एक कमेटी बनाई गई जहां राजधानी के कुछ उद्योग से जुड़े लोगों को पदाधिकारी भी बना दिया गया। कमेटी ने 2016 में डीजल ट्रेड के लिए इंजन, बोलेरो और इससे जुड़े कई समान पर 50 लाख खर्च कर दिए।जबकि यह ट्रेड संचालित 5 ट्रेडों के सूची में ही नहीं था।पिछले 10 साल डीजल ट्रेड के समान पड़े पड़े अब अनुपयोगी हो गए। 400 से ज्यादा ग्रामीण युवाओं को विभन्न ट्रेडों की अधोगिक प्रशिक्षण संस्थान में अब भी कई जरूरी सुविधा नदारद है। तय प्रावधान के मुताबिक दी गई सहयोग राशि से संस्थान को आय अर्जित कर 20 साल के भीतर वापस भी करना होता है, पर संस्थान नियमित इंस्टॉलमेंट का भुगतान भी नहीं कर पा रही है। हैरानी की बात है कि सालों से रूपये खर्च हो रहे पर आडिट में फिजूल खर्ची जवाबदारों को तक नजर नहीं आई। अब जिला पंचायत अध्यक्ष ने मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग उठा दिया है।

 

 

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