ग्राम पंचायत चंद्रनगर में विकास के नाम पर बड़ा खेल! नाममात्र मुरम, कागजों में 1320 ट्रैक्टर का बिल; पहली बारिश में खुली अनियमितताओं की पोल

Major scam in the name of development in Gram Panchayat Chandranagar! Bills for 1,320 tractor-loads of *murrum* (gravel) submitted on paper, while only a negligible amount was actually supplied; irregularities exposed by the very first rain.

बलरामपुर/(शोएब सिद्दिकी) जिले के ग्राम पंचायत चंद्रनगर में ग्रामीणों को बरसात के दौरान कीचड़ और जलभराव से राहत दिलाने के उद्देश्य से सड़क मुरमीकरण का कार्य कराया गया था। लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि धरातल पर बेहद कम मुरम डाली गई, जबकि अभिलेखों में भारी मात्रा में मुरम दर्शाकर सरकारी राशि निकालने का प्रयास किया गया।

ग्रामीणों के अनुसार सड़क पर केवल लगभग 100 से 150 ट्रैक्टर मुरम अथवा मिट्टी डालकर कार्य पूरा दिखा दिया गया, जबकि पंचायत के अभिलेखों में करीब 1320 ट्रैक्टर मुरम का बिल तैयार किए जाने की चर्चा है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि अभिलेखों और मौके की स्थिति का मिलान कराया जाए तो वास्तविकता स्वतः सामने आ जाएगी। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

पहली ही बारिश में मुरमीकरण कार्य की गुणवत्ता पर भी सवाल खड़े हो गए। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क पर डाली गई मुरम और मिट्टी बारिश में बह गई, जिससे पूरा मार्ग कीचड़ और दलदल में बदल गया। इससे पैदल चलने वाले ग्रामीणों, स्कूली बच्चों, बुजुर्गों तथा दोपहिया वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि जिस मुरमीकरण कार्य से राहत मिलने की उम्मीद थी, वही अब लोगों के लिए परेशानी का कारण बन गया है।

 

ग्रामीणों ने कहा कि यह गांव का प्रमुख मार्ग है और बरसात के दिनों में मरीजों, गर्भवती महिलाओं तथा अन्य आपातकालीन परिस्थितियों में लोगों को मुख्य सड़क तक पहुंचने में काफी कठिनाई होती है।

 

ग्रामीणों ने पंचायत की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि ग्राम सभा और आम सभा की बैठकें नियमित रूप से आयोजित नहीं की जातीं तथा विकास कार्यों को लेकर ग्रामीणों से राय नहीं ली जाती। उनका कहना है कि पंचायत के सचिव, सरपंच पुत्र तथा कुछ चुनिंदा लोगों द्वारा ही अधिकांश निर्णय लिए जाते हैं, जिससे विकास कार्यों में पारदर्शिता नहीं दिखाई देती।

 

ग्रामीणों का कहना है कि जब इस कथित अनियमितता को मीडिया द्वारा प्रमुखता से प्रकाशित किया गया और मामला प्रशासन तक पहुंचा, तब जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) ने संबंधित मुरमीकरण कार्य की राशि पर रोक लगा दी। ग्रामीणों का आरोप है कि इसके बाद सरपंच बौखला गए और भ्रष्टाचार संबंधी समाचार प्रकाशित करने वाले पत्रकार अली खान के विरुद्ध पुलिस में कथित रूप से झूठा आवेदन देकर दबाव बनाने का प्रयास किया। इस संबंध में सरपंच का पक्ष प्राप्त नहीं हो सका है।

 

*भ्रष्टाचार की खबर प्रकाशित करने वाले पत्रकार पर भी शिकायत*

 

ग्रामीणों के अनुसार पूर्व में ग्राम पंचायत की कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार से संबंधित समाचार प्रकाशित करने वाले पत्रकार अली खान के विरुद्ध सरपंच द्वारा पुलिस विभाग में एक आवेदन दिया गया, जिसमें पत्रकार पर जातिसूचक गाली-गलौज और वसूली जैसे गंभीर आरोप लगाए गए। ग्रामीणों का कहना है कि यह आवेदन समाचार प्रकाशित होने और प्रशासन द्वारा कार्रवाई किए जाने के बाद द्वेषवश दिया गया। उनका दावा है कि पत्रकार अली खान केवल समाचार संकलन और तथ्य प्रस्तुत करने के लिए मौके पर पहुंचे थे तथा उन्होंने कथित अनियमितताओं को उजागर किया। ग्रामीणों ने इन आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

 

अब ग्रामीणों की नजर जिला प्रशासन पर टिकी हुई है। उनका कहना है कि यदि सड़क मुरमीकरण कार्य में वास्तव में अनियमितता हुई है तो पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए, संबंधित अभिलेखों की जांच की जाए, कार्य का भौतिक सत्यापन कराया जाए तथा दोषी पाए जाने वाले जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाए।

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