छत्तीसगढ़

175 लोकवाद्य संरक्षित करने वाले अनूप रंजन को बड़ा सम्मान

Major honor for Anoop Ranjan, preserver of 175 folk instruments

रायपुर। पद्मश्री अनूप रंजन पांडेय को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया। छत्तीसगढ़ के जाने-माने संस्कृतिकर्मी और पद्मश्री से सम्मानित अनूप रंजन पांडेय को गुरुवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया। सम्मान प्राप्त करने के बाद अनूप रंजन पांडेय ने इसे छत्तीसगढ़ के आदिवासी कलाकारों और उन्होंने कहा कि यह सम्मान उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि भर नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की लोक और आदिवासी कला-संस्कृति से जुड़े हजारों कलाकारों की मेहनत और साधना का सम्मान है। नई दिल्ली में हुए समारोह में राष्ट्रपति ने देश के अलग-अलग राज्यों से आए कलाकारों को पुरस्कार देकर सम्मानित किया।

2500 लोकगीत-गाथाएं और 175 लोकवाद्य सहेजे

पद्मश्री अनूप रंजन पांडेय ने छत्तीसगढ़ की लोक परंपराओं और लोक संस्कृति को सहेजने का काम किया। उन्होंने प्रदेश के 2,500 लोकगीत, लोकगाथाएं और लोककथाएं, नाचा के 150 हास्य कार्यक्रम और 175 लोक वाद्य जुटाए।

छत्तीसगढ़ बनने के बाद उन्होंने 80 लोक वाद्य महंत घासीदास संग्रहालय और संस्कृति विभाग को दिए। भोपाल के मध्यप्रदेश जनजातीय संग्रहालय के लिए उन्होंने देशभर से 200 फूंक से बजाए जाने वाले लोक वाद्य भी जुटाए।

बंदूक छोड़ो, ढोल पकड़ो’ से दिया शांति का संदेश

बस्तर की लोककला से जुड़े काम के दौरान पांडेय ने आदिवासी कलाकारों के साथ मिलकर करीब डेढ़ दशक पहले ‘बस्तर बैंड’ की शुरुआत की। बैंड ने बस्तर की पारंपरिक और दुर्लभ लोकवाद्य परंपरा को देश-दुनिया के मंच तक पहुंचाया।

बस्तर बैंड के जरिए ‘बंदूक छोड़ो… ढोल पकड़ो’ अभियान चलाया गया। इसका उद्देश्य युवाओं को रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ना और लोकगीत, लोकसंगीत, लोकगाथा और आदिवासी संस्कृति के जरिए शांति का संदेश देना था।

इस अभियान के तहत 100 से ज्यादा कला मंडलियों को फिर से सक्रिय किया गया और 5000 से ज्यादा कलाकारों को जोड़ा गया। बस्तर बैंड के 11 कलाकारों को राष्ट्रीय और राज्य स्तर के पुरस्कार भी मिल चुके हैं।

लोककला में पीएचडी, संगीत नाटक अकादमी से भी जुड़े रहे

पांडेय ने 2015 में इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़ से लोक कला में पीएचडी की। वे करीब 15 साल तक तीन कार्यकाल में संगीत नाटक अकादमी, दिल्ली की जनरल काउंसिल के सदस्य भी रहे।

वर्तमान में वे ‘चिन्हारी रंगमंडल’ के निर्देशक और बस्तर बैंड के संचालक के रूप में सक्रिय हैं। उनकी पत्नी अस्मिता पांडेय और बेटी अनन्या पांडेय भी उनकी सांस्कृतिक यात्रा में सहयोग करती हैं।

राष्ट्रपति ने लोककलाओं के संरक्षण पर दिया जोर

समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि सम्मानित कलाकार भारत का ऐसा सांस्कृतिक मानचित्र सामने रखते हैं, जिसमें देश की मिट्टी की कहानियां, गीत, नृत्य, उत्सव और भाषाओं-बोलियों की परंपराएं शामिल हैं।

उन्होंने लोक और जनजातीय कलाओं को संरक्षित करने और उनका दस्तावेजीकरण करने की जरूरत पर भी जोर दिया।

 

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button