बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने एक संवेदनशील मामले में मानवीय और कड़ा रुख अपनाते हुए दो नाबालिग भाई-बहन को चाइल्ड वेलफेयर सेंटर में ही रखने का आदेश दिया है। हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि दोनों बच्चों की शिक्षा, रहने और सुरक्षा सहित पूरी जिम्मेदारी अब राज्य सरकार उठाएगी। कोर्ट के कड़े रुख के बाद मंगलवार को बैकुंठपुर कोरिया की कलेक्टर और अंबिकापुर के एडीएम खुद दोनों बच्चों को कड़ी सुरक्षा के बीच लेकर हाई कोर्ट पहुंचे थे।
चैंबर में हुई काउंसलिंग, बच्चों ने कहा- ‘हम सेंटर में ही सुरक्षित हैं’
मंगलवार दोपहर करीब ढाई बजे मामले की सुनवाई शुरू हुई। चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली डिवीजन बेंच के निर्देश पर दोनों जिलों के आला अधिकारी और चाइल्ड केयर सेंटर के स्टाफ भाई-बहन को लेकर कोर्ट रूम में मौजूद थे। कोर्ट ने बेहद संवेदनशील माहौल में बच्चों से बातचीत की और जरूरी सवाल पूछे। काउंसलिंग के दौरान दोनों मासूमों ने कोर्ट को बताया कि वे अपनी मर्जी से चाइल्ड वेलफेयर सेंटर में रह रहे हैं और वहां खुद को पूरी तरह सुरक्षित महसूस करते हैं। बच्चों की सहमति और इच्छा को सर्वोपरि मानते हुए अदालत ने उन्हें वापस सेंटर भेजने और उनकी हर जरूरत का ख्याल रखने का जिम्मा सरकार को सौंप दिया। मामले की अगली सुनवाई 2 जुलाई को होगी, हालांकि कोर्ट ने साफ किया है कि अगली पेशी पर बच्चों और बड़े अधिकारियों को आने की जरूरत नहीं है।
कलेक्टर्स के वीसी से न जुड़ पाने पर व्यक्तिगत रूप से किया था तलब
इससे पहले सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान राज्य शासन ने कोर्ट को बताया था कि 12 वर्षीय बालिका अंबिकापुर के बालिका गृह में और 9 वर्षीय बालक बैकुंठपुर के चाइल्ड वेलफेयर सेंटर में सुरक्षित हैं। दोनों बच्चों को वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट के सामने पेश किया गया था, लेकिन संबंधित जिलों के कलेक्टर्स वीसी से कनेक्ट नहीं हो पाए। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा ने मामले की गंभीरता और बच्चों की काउंसलिंग को जरूरी समझते हुए नाराजगी जताई थी और आदेश दिया था कि दोनों जिलों के जिम्मेदार अधिकारी बच्चों को अफसरों की मौजूदगी और कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के साथ व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश करें। कोर्ट के निर्देश पर मंगलवार सुबह 11:30 बजे ही अधिकारी बच्चों को लेकर बिलासपुर पहुंच गए थे।
सीएस और डीजीपी को सौंपी थी सुरक्षा की कमान
मासूम बच्चों की सुरक्षा को लेकर हाई कोर्ट कितना गंभीर था, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि चीफ जस्टिस ने स्वयं राज्य के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक को इस आदेश का अक्षरशः पालन कराने की जिम्मेदारी सौंपी थी। बच्चों की यात्रा के दौरान संबंधित जिलों के डीएसपी और चाइल्ड केयर संस्थान के सक्षम अधिकारियों को साए की तरह साथ रहने का आदेश दिया गया था।
सौतेली बहन की याचिका और बच्चे का चौंकाने वाला खुलासा
यह है पूरा मामला
दरअसल, बच्चों की सौतेली बहन ने हाई कोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि प्रशासन ने उसके नाबालिग भाई-बहन को अवैध रूप से हिरासत में रखा हुआ है। लेकिन जब कोर्ट ने इस पर पिछली सुनवाई की, तो एक बच्चे ने अदालत के सामने बेहद चौंकाने वाला और दिल दहला देने वाला खुलासा किया।
बच्चे ने कोर्ट को बताया कि याचिकाकर्ता सौतेली बहन के पति ने ही उसके साथ दुष्कर्म किया है, जिसके कारण वे अपनी जान बचाने के लिए बाल गृह में रह रहे हैं और वहां पूरी तरह सुरक्षित हैं। इस खुलासे के बाद याचिकाकर्ता महिला ने कोर्ट में सफाई देते हुए कहा कि उसने खुद अपने आरोपित पति के खिलाफ पुलिस में मामला दर्ज कराया है। बहरहाल, बच्चों के इस खौफनाक खुलासे और सौतेली बहन के घर न जाने की इच्छा के बाद हाई कोर्ट ने बच्चों को उनके सुरक्षित आशियाने चाइल्ड वेलफेयर सेंटर में ही रखने का अंतिम फैसला सुनाया है।
