सीतापार में प्रशासन की बड़ी कार्रवाई

Major action by the administration in Sitapar

संवाददाता……. अमित पाटले

लोकेशन…..बेमेतरा (छत्तीसगढ़)

बेमेतरा जिले के नवागढ़ ब्लॉक मुख्यालय अंतर्गत छितापार में विवादित भूमि पर जिला प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए अवैध निर्माणों को जमींदोज कर दिया। प्रशासन का दावा है कि संबंधित भूमि सरकारी मरघट की जमीन है, जिस पर अतिक्रमण कर भवनों का निर्माण किया गया था। वहीं प्रभावित परिवारों का कहना है कि उन्होंने विधिवत रजिस्ट्री कराकर अपनी जीवनभर की जमा पूंजी से मकान बनाए थे, जिन्हें अब तोड़ दिया गया है। कार्रवाई के बाद क्षेत्र में हड़कंप का माहौल है।

छीतापार क्षेत्र में उस समय हलचल मच गई जब जिला प्रशासन, राजस्व अमला, नगर पंचायत और पुलिस बल की टीम जेसीबी मशीनों के साथ मौके पर पहुंची। प्रशासन ने विवादित भूमि पर बने मकानों और अन्य निर्माणों को हटाने की कार्रवाई शुरू की। देखते ही देखते कई भवनों को ध्वस्त कर दिया गया। कार्रवाई के दौरान सुरक्षा व्यवस्था के लिए बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा।

जानकारी के अनुसार, संबंधित भूमि को पांच लोगों ने रजिस्ट्री के माध्यम से खरीदा था। जमीन खरीदने के बाद सभी ने लाखों रुपये खर्च कर मकान एवं अन्य निर्माण कार्य कराए थे। बाद में राजस्व रिकॉर्ड और प्रशासनिक जांच में यह भूमि सरकारी मरघट के रूप में दर्ज होने की बात सामने आई, जिसके बाद मामला विवादों में आ गया।

प्रभावित पक्षों का कहना है कि मामले को लेकर न्यायालय में भी कानूनी लड़ाई लड़ी गई थी। उनके अनुसार, उन्हें हाईकोर्ट से अंतरिम राहत और स्टे आदेश प्राप्त हुआ था। हालांकि स्टे की अवधि समाप्त होने के बाद प्रशासन ने अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई तेज कर दी और निर्माणाधीन तथा निर्मित भवनों को जमींदोज कर दिया।

कार्रवाई के बाद प्रभावित परिवारों में भारी नाराजगी देखने को मिली। उनका कहना है कि उन्होंने वैध दस्तावेजों के आधार पर जमीन खरीदी थी और जीवनभर की कमाई मकान बनाने में लगा दी थी। भवन टूटने से उन्हें लाखों रुपये का नुकसान हुआ है। दूसरी ओर प्रशासन का कहना है कि सरकारी भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए नियमानुसार कार्रवाई की गई है और शासन की भूमि पर किसी भी प्रकार का अवैध कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

छीतापार में हुई इस कार्रवाई ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। एक तरफ प्रशासन सरकारी भूमि की सुरक्षा और अतिक्रमण हटाने की बात कर रहा है, वहीं दूसरी ओर प्रभावित परिवार अपने नुकसान और न्याय की मांग को लेकर आवाज उठा रहे हैं। अब सभी की नजर इस मामले में आगे होने वाली कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हुई है।

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