रीवा मप्र रिपोर्टर सुभाष मिश्रा
रीवा। कठिन परिस्थितियों से संघर्ष करते हुए रीवा जिले की बेटी कल्पना प्रजापति ने भारतीय रेलवे में असिस्टेंट लोको पायलट (ALP) बनकर सफलता की नई मिसाल कायम की है। मां का साया जन्म के साथ ही सिर से उठ गया और बाद में पिता का साथ भी छूट गया, लेकिन कल्पना ने हौसला नहीं खोया और अपने सपनों को सच कर दिखाया।
रीवा जिले के बहुरीबांध गांव की रहने वाली 23 वर्षीय कल्पना प्रजापति का जीवन संघर्षों से भरा रहा। जन्म के समय ही मां का निधन हो गया था, जिसके बाद उनकी परवरिश दादी ललैया प्रजापति ने की। सीमित संसाधनों और पारिवारिक चुनौतियों के बावजूद उन्होंने शिक्षा और मेहनत का दामन नहीं छोड़ा।
साल 2024 में उस समय बड़ा आघात लगा जब प्रशिक्षण अधिकारी (टीओ) परीक्षा से दो दिन पहले करंट लगने से उनके पिता गोधन लाल प्रजापति का निधन हो गया। इस दुखद घटना के कारण वह परीक्षा नहीं दे सकीं, लेकिन उन्होंने हार मानने के बजाय खुद को संभाला और आगे बढ़ती रहीं।
पिता के निधन के बाद कल्पना ने लाइब्रेरी में काम करते हुए अपनी पढ़ाई जारी रखी। दादी, दूसरी मां, चाचा-चाची और मामा के सहयोग से उन्होंने रीवा शासकीय आईटीआई से प्रशिक्षण प्राप्त किया। इस दौरान प्रशिक्षण अधिकारी नरेंद्र द्विवेदी के मार्गदर्शन ने भी उन्हें आगे बढ़ने में मदद की।
उनकी मेहनत रंग लाई और उनका चयन दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के बिलासपुर मंडल में असिस्टेंट लोको पायलट पद पर हुआ। रेलवे प्रशासन से नियुक्ति पत्र मिलने के बाद अब वह 18 जून 2026 को ट्रेन की पहली ट्रायल रनिंग में शामिल होंगी।
कल्पना का कहना है कि इस उपलब्धि से उन्हें बेहद खुशी है, लेकिन यदि उनके पिता आज जीवित होते तो यह खुशी और भी खास होती। वहीं दादी ललैया प्रजापति ने कहा कि परिवार को बेटी की सफलता पर गर्व है और उनकी यह उपलब्धि क्षेत्र की अन्य बेटियों के लिए प्रेरणा बनेगी।
संघर्षों से निकलकर सफलता की पटरी पर दौड़ती कल्पना प्रजापति की कहानी साबित करती है कि मजबूत इरादों के आगे परिस्थितियां भी झुक जाती हैं।
