रीवा मप्र रिपोर्टर सुभाष मिश्रा

रीवा के नवीन जिला न्यायालय परिसर में सोमवार को अधिवक्ताओं ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर जमकर हंगामा और नारेबाजी की। पार्किंग, चेंबर अलॉटमेंट और अन्य मूलभूत सुविधाओं की कमी से नाराज वकीलों ने कामकाज ठप कर दिया, जिससे न्यायालय में पेशी पर आए पक्षकारों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
अधिवक्ताओं का आरोप है कि वे पिछले चार महीनों से चेंबर अलॉट न होने, अव्यवस्थित पार्किंग, कैंटीन की अनुपलब्धता, पेयजल और शौचालय जैसी समस्याओं को लगातार उठा रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं किया गया। बैठने की उचित व्यवस्था न होने के कारण उन्हें न्यायालय परिसर में ही असुविधाजनक हालात में काम करना पड़ रहा है, जिससे न्यायिक कार्य भी प्रभावित हो रहा है।
नाराज अधिवक्ता अपनी समस्याएं सुनने के लिए स्वयं प्रधान न्यायाधीश को मौके पर बुलाने की मांग पर अड़े रहे। प्रधान न्यायाधीश की ओर से उनके प्रतिनिधि ने मौके पर पहुंचकर समझाइश दी और समस्याओं के निराकरण का आश्वासन भी दिया, लेकिन अधिवक्ता इससे संतुष्ट नहीं हुए। उनका कहना था कि जब तक शीर्ष स्तर पर उनकी बात नहीं सुनी जाएगी, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
प्रदर्शन के दौरान स्थिति उस समय तनावपूर्ण हो गई जब अधिवक्ताओं ने थाना प्रभारी हितेंद्रनाथ शर्मा को न्यायालय परिसर से बाहर जाने को कहा। अधिवक्ताओं का कहना था कि यह न्यायालय परिसर उनका है और यहां पुलिस की मौजूदगी स्वीकार्य नहीं है। इसी दौरान धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई और थाना प्रभारी बैरिकेट से गिर पड़े। इसके बाद भी अधिवक्ताओं ने उन्हें कड़े शब्दों में वहां से जाने को कहा।
इस पूरे घटनाक्रम के चलते न्यायालय में कई मामलों की सुनवाई समय पर नहीं हो सकी और परिसर में अव्यवस्था का माहौल बन गया। अधिवक्ताओं ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही उनकी समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और उग्र किया जाएगा।
वहीं, पूरे मामले पर सीएसपी राजीव पाठक ने बताया कि न्यायालय के वरिष्ठ अधिकारियों और अधिवक्ताओं के बीच किसी बात को लेकर अनबन हुई थी। पुलिस की मौजूदगी में दोनों पक्षों के बीच आपसी तालमेल बिठाने की कोशिश की गई है। प्रारंभिक तौर पर पार्किंग को लेकर कहासुनी और उससे उपजी नाराजगी सामने आई
