कुमनार में पुलिस का आखिरी सुरक्षा कैंप स्थापित, माओवादियों के ‘सेफजोन’ पर बड़ा प्रहार

Last police security camp established in Kumnar, major blow to Maoist 'safe zone'

नारायणपुर। नारायणपुर पुलिस ने दशकों से माओवादियों का ‘सेफजोन’ माने जाने वाले दुर्गम क्षेत्र कुमनार में नवीन सुरक्षा एवं जन सुविधा कैंप स्थापित कर एक ऐतिहासिक सफलता हासिल की है। ‘माड़ बचाओ’ अभियान के तहत स्थापित यह कैंप वर्ष 2026 का आठवां और क्षेत्र का अंतिम सामरिक पड़ाव है, जिससे अब अबूझमाड़ का सीधा संपर्क बीजापुर के भैरमगढ़ से जुड़ गया है।

कुमनार वही क्षेत्र है जहां कभी माओवादी सेंट्रल कमेटी का अघोषित शासन चलता था और जहां कुख्यात नक्सली बसवा राजू को सुरक्षाबलों ने ढेर किया था। नारायणपुर पुलिस, डीआरजी, बस्तर फाइटर्स और आईटीबीपी (38वीं, 44वीं, 41वीं, 45वीं, 53वीं और 29वीं वाहिनी) के संयुक्त प्रयासों से अब यहां तिरंगा निर्भीक होकर लहराएगा।

इस कैंप की स्थापना से ओरछा-कुमनार-भैरमगढ़ के बीच डायरेक्ट रोड कनेक्टिविटी सुनिश्चित हुई है। इससे पूर्व, वर्ष 2025 तक ओरछा के भीतर का हिस्सा नक्सलियों के नियंत्रण में था, लेकिन अब यहां विकास की मुख्यधारा पहुंच चुकी है।

जिला मुख्यालय से 102 किमी दूर स्थित इस कैंप के माध्यम से आसपास के आधा दर्जन गांवों (लेकवाडा, नेडअट्टे, डोडूम आदि) में सड़क एवं पुल-पुलिया निर्माण में तेजी आएगी। शिक्षा, चिकित्सा और मोबाइल नेटवर्क की पहुंच सुगम होगी। नक्सल विरोधी अभियानों को मजबूती मिलेगी।

बस्तर आईजी पी. सुन्दराज और नारायणपुर एसपी रोबिनसन गुरिया के मार्गदर्शन में संचालित इस अभियान ने अबूझमाड़ को पूरी तरह नक्सल मुक्त करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। पुलिस प्रशासन का लक्ष्य ‘शांतिपूर्ण एवं समृद्ध नारायणपुर’ बनाना है, जहां दशकों से अलग-थलग पड़े ग्रामीणों को लोकतंत्र की बुनियादी सुविधाओं का लाभ मिल सके।

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