देवभोग में किडनी बीमारी का कहर: 6 साल में 10 से ज्यादा मौतें, दूषित पानी बना चिंता का कारण

Kidney disease wreaks havoc in Devbhog: Over 10 deaths in 6 years; contaminated water a cause for concern.

रिपोर्टर.. लोकेश्वर सिन्हा गरियाबंद 

गरियाबंद । गरियाबंद में किडनी की बीमारी से जूझते लोगों का मामला अब तक केवल सुपेबेड़ा में सामने आया था, लेकिन किडनी रोगी और रोगियों मौत का मामला अब देवभोग मुख्यालय में भी बढ़ने लगा है। देवभोग नगर के वार्ड क्रमांक 3 में बीते 6 साल में 10 से ज्यादा लोगों की मौत किडनी की बिमारी से हो गई।

VO… देवभोग नगर पंचायत के वार्ड क्रमांक 3 में रहने वाले ज्यादातर लोग अपने घर के बोर में अथवा नजदीक के जल स्रोत का पेय जल के लिए इस्तेमाल करना बंद कर दिए हैं। ये लोग पीने का पानी बॉटल, आधा किमी दूर स्थित सोर्स से ले कर आते हैं। यह बदलाव 2023 से अचानक हुआ इससे पहले तक लोग अपने ही मोहल्ले का पानी पिया करते थे। लेकिन मोहल्ले में एक के बाद एक किडनी मरीजो की संख्या निकल कर सामने आई। 6 साल में 10 से ज्यादा लोग किडनी के रोगी बने और मौत के मुंह में समा गए।शारीरिक कष्ट शुरू होने के लक्षण आए तो लोगों ने पानी की जांच की मांग किया। शुरुवाती जांच में हैरान कर देने वाला रिपोर्ट निकल कर आया…. मोहल्ले में मौजूद 50 से ज्यादा सोर्स के पानी में टीडीएस काउंट 800 से 1200 प्रति मिली ग्राम निकला। इस रिपोर्ट के बाद जागरूकता फैली और लोगों ने पीने का पानी बदलना ही मुनासिब समझा…

मौत का आंकड़ा बढ़ता गया एक पीड़ित तो पत्नी के किडनी के सहारे संघर्ष कर रहा है लगातार पानी की जांच की मांग होती रही, वैकल्पिक व्यवस्था की मांग भी उठी पर मुख्यालय में फैल रहे त्रासदी से अनभिज्ञ प्रशाशन ने अनदेखी कर दिया। पीएचई विभाग के अफसर भी मानते है कि अधिकतम 500 टीडीएस स्वीकार है फिर भी आंख मूंद लिया है।

नगर के वार्ड 3 में ही नहीं बल्कि पूरे नगर के आधा हिस्से में जल स्रोत दूषित ही चुके हैं। लेकिन प्रशाशन का ध्यान केवल सुपेबेड़ा पर केन्द्रित है।जानकारी के मुताबिक नगर में किडनी के रोग से मरने वालो की संख्या 20 से भी ज्यादा है। समय रहते इस त्रासदी को रोका नहीं गया तो एक और सुपेबेड़ा बनने से कोई नहीं रोक सकेगा।

 

 

 

 

 

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