‘सड़क है या जानलेवा गड्ढा?’ सूरजपुर में बदहाल सड़कों पर लोगों का गुस्सा

'Is this a road or a death trap?' Public anger over dilapidated roads in Surajpur.

सूरजपुर: गांव से लेकर शहरों तक सड़कों का जाल बिछाने और बेहतर कनेक्टिविटी के सरकारी दावों की पोल सूरजपुर जिले की बदहाल सड़कों ने खोल दी है। जिले में हाईवे से लेकर ग्रामीण सड़कों तक जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे राहगीरों और वाहन चालकों के लिए जानलेवा साबित हो रहे हैं। बारिश के बाद सड़कों की स्थिति और खराब हो गई है। कई स्थानों पर सड़क और गड्ढे में फर्क करना मुश्किल हो गया है। जर्जर सड़कों पर सफर करना लोगों की मजबूरी बन गया है। यही वजह है कि खराब सड़को को लेकर आये दिन चक्काजाम की वजह से कानून व्यवस्था की स्थिति निर्मित होती है।

सबसे ज्यादा परेशानी दोपहिया वाहन चालकों को हो रही है। अचानक गड्ढे सामने आने से वाहन अनियंत्रित होकर गिरने की घटनाएं सामने आ रही हैं। कई मार्गों पर भारी वाहनों की आवाजाही से सड़क की हालत लगातार बिगड़ती जा रही है।

ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति और गंभीर है, जहां सड़क खराब होने के कारण गांवों से मुख्य मार्ग तक पहुंचना भी मुश्किल हो रहा है। लोगों का आरोप है कि सड़क निर्माण के बाद गुणवत्ता की निगरानी और समय पर मरम्मत नहीं होने के कारण कुछ ही समय में सड़कें उखड़ने लगती हैं। विभागीय जिम्मेदारों की उदासीनता का खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है।

हादसों के बाद भी नहीं जाग रहा प्रशासन

जिले में सड़क हादसों की घटनाएं लगातार चिंता बढ़ा रही हैं। हालांकि हर दुर्घटना के लिए सड़क की खराब स्थिति को ही जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता, लेकिन जर्जर सड़कें हादसों का जोखिम जरूर बढ़ा रही हैं। लोगों का कहना है कि सड़कें सिर्फ आवागमन का माध्यम नहीं, बल्कि विकास की पहली सीढ़ी हैं। ऐसे में गड्ढों से भरी सड़कों के बीच विकास के दावों पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

लोगों की तीखी प्रतिक्रिया

सूरजपुर निवासी रमेश साहू ने कहा कि सड़कें खराब होने से रोजाना आवागमन में परेशानी होती है। बाइक से निकलना सबसे ज्यादा जोखिम भरा हो गया है। कई बार गड्ढों से बचने के चक्कर में वाहन चालक दुर्घटना का शिकार हो जाते हैं।

व्यापारी संजय गुप्ता ने बताया कि खराब सड़कों का असर कारोबार पर भी पड़ रहा है। माल ढुलाई में समय और खर्च दोनों बढ़ रहे हैं। इसके बावजूद जिम्मेदार विभाग केवल मरम्मत के आश्वासन तक सीमित है।

ग्रामीण महिला माया देवी ने कहा कि गांव की सड़क खराब होने से बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों को अस्पताल तक ले जाने में परेशानी होती है। बारिश के दिनों में समस्या कई गुना बढ़ जाती है।

Exit mobile version