छत्तीसगढ़
400 किमी दूर से आई जिंदगी की उम्मीद: महाराष्ट्र से पहुंचे बीमार गिद्ध को उदंती-सीतानदी टाइगर रिज़र्व ने दिया नया जीवन
Hope for life comes from 400 km away: Udanti-Sitanadi Tiger Reserve gives new life to a sick vulture from Maharashtra

देवीचरण ठाकुर गरियाबंद
उदंती-सीतानदी टाइगर रिज़र्व में वन्यजीव संरक्षण की एक और सराहनीय मिसाल देखने को मिली है। महाराष्ट्र के ताडोबा-अंधारी टाइगर रिज़र्व से लगभग 400 किलोमीटर दूर से लाए गए एक गंभीर रूप से बीमार व्हाइट रम्प्ड वल्चर (गिद्ध) का सफल उपचार एवं रेस्क्यू कर उसकी जान बचाई गई।

गिद्ध की बिगड़ती हालत को देखते हुए इनामगांव (बगर) क्षेत्र में पेट्रोलिंग के दौरान सतर्क वनकर्मी राधेश्याम यादव ने तत्काल इसकी सूचना वरिष्ठ अधिकारियों को दी। सूचना मिलते ही रेस्क्यू टीम सक्रिय हुई और बिना समय गंवाए उपचार शुरू किया गया। जांच में गिद्ध की पीठ पर माइक्रो ट्रांसमीटर और जीपीएस लगे होने की पुष्टि हुई।

प्रारंभिक जांच में गिद्ध की हालत डिहाइड्रेशन व बीमारी के कारण गंभीर पाई गई। विशेषज्ञों की निगरानी में उसे पानी व आर्टिफिशियल फीड दी गई, जिसके बाद उसकी स्थिति में धीरे-धीरे सुधार हुआ। सुरक्षित रेस्क्यू के बाद गिद्ध को जंगल सफारी के डॉक्टरों की देखरेख में गारियाबंद स्थित रेस्क्यू सेंटर ले जाया गया, जहां उसका इलाज जारी है।

इस पूरे रेस्क्यू ऑपरेशन में उदंती-सीतानदी टाइगर रिज़र्व की टीम, जंगल सफारी रायपुर के डॉक्टरों एवं वल्चर एक्सपर्ट श्री अभिजीत शर्मा का अहम योगदान रहा। अधिकारियों के अनुसार उपचार के बाद गिद्ध को सुरक्षित वातावरण में खुले जंगल में छोड़ा जाएगा।
गौरतलब है कि उदंती-सीतानदी टाइगर रिज़र्व का 70 प्रतिशत क्षेत्र पहाड़ी और दुर्गम है, जहां पूर्व में भी गिद्धों की उपस्थिति दर्ज की जा चुकी है। यह सफल रेस्क्यू अभियान वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।


