लोकेशन – रीवा मप्र रिपोर्टर सुभाष मिश्रा
रीवा। गंगेव जनपद के बहुचर्चित कराधान घोटाले में अब एक नया मोड़ आ गया है। आरोपियों की हाईकोर्ट में पेश हुई रिपोर्ट पर सवाल खड़े हो गए हैं। रिटायर एसडीओपी कपिल द्विवेदी ने कोर्ट को भ्रामक जानकारी देकर मामले को गुमराह किया। कराधान घोटाले के मास्टरमाइंड रजनीश सोनी और अन्य पर दर्ज मामले में रिटायर एसडीओपी मंगराम ने हाईकोर्ट में हलफनामा प्रस्तुत किया था।
जानकारी के अनुसार एडिशनल एसपी मंगराम की रिपोर्ट पर संदेह जताते हुए कोर्ट ने शासन से पूछा है कि इस मामले में अब तक क्या कार्रवाई हुई।
क्या है पूरा मामला
गौरतलब है कि 14वीं वित्त की परफॉर्मेंस ग्रांट की राशि को गंगेव की 38 पंचायतों के खाते खुलवाकर फर्जी तरीके से निकाला गया था। ग्राम पंचायतों के विकास कार्यों के नाम पर भारी राशि की बंदरबांट हुई और ठेकेदार-कंट्रेक्टर को भुगतान कर फर्जी विकास कार्य दिखाए गए।
मामले की जांच के दौरान तत्कालीन मुख्य कार्यपालन अधिकारी, इंजीनियर, लेखापाल समेत कई अधिकारी-कर्मचारी निलंबित किए गए। एफआईआर दर्ज हुई और कई आरोपियों की गिरफ्तारी हुई। बावजूद इसके अब तक राशि की वसूली और वास्तविक विकास कार्य का कोई अता-पता नहीं है।
एसडीओपी ने उच्च न्यायालय में दिया था गलत शपथ-पत्र
इस मामले में जब आरोपियों ने अग्रिम जमानत के लिए हाईकोर्ट जबलपुर में याचिका दायर की, तब रिटायर एसडीओपी कपिल द्विवेदी ने कोर्ट में गलत जानकारी प्रस्तुत कर दी। उनके हलफनामे में कई तथ्य छुपा लिए गए।
याचिकाकर्ताओं की रिहाई पर भी सवाल उठे। मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने शासन से विस्तृत रिपोर्ट तलब कर ली है
फिर दायर की गई रिव्यू पिटिशन
मामले में नई जानकारी सामने आने के बाद सामाजिक कार्यकर्ताओं शिवानंद द्विवेदी एवं अधिवक्ता संजय सिंह ने पुनः रिव्यू पिटिशन दायर की। इसमें शासन से ठोस कार्रवाई की मांग की गई है।
हाईकोर्ट ने शासन से तलब की रिपोर्ट
हाईकोर्ट जस्टिस विशाल मिश्रा की बेंच ने शासन से जवाब मांगा है कि रिटायर एसडीओपी मंगराम द्वारा कोर्ट को गुमराह करने पर क्या कार्रवाई हुई। साथ ही शासन से पूछा है कि गंगेव जनपद की 38 पंचायतों के फर्जीवाड़े में दोषी पाए गए अधिकारियों और ठेकेदारों के विरुद्ध वसूली की क्या स्थिति है।
