हाईकोर्ट का सख्त निर्देश, बस ऑपरेटरों पर शिकंजा

High Court's strict directive; crackdown on bus operators.

बिलासपुरः छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने यात्री बसों और स्टेज कैरिज वाहनों के संचालन में लाइसेंसधारी कंडक्टर की अनिवार्यता को लेकर परिवहन विभाग को सख्त निर्देश दिए हैं। जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि यदि कोई बस बिना लाइसेंसधारी कंडक्टर के संचालित होती है, तो संबंधित अधिकारी कानून के अनुसार कार्रवाई करें।

याचिकाकर्ता विनेश कुमार चोपड़ा ने परिवहन विभाग के सचिव, परिवहन आयुक्त और विभिन्न जिलों के परिवहन अधिकारियों को पक्षकार बनाया था। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश में बड़ी संख्या में यात्री बसें बिना लाइसेंसधारी कंडक्टर के चल रही हैं। याचिकाकर्ता के अनुसार, प्रदेश में 68,369 पंजीकृत यात्री बसें हैं, जबकि लाइसेंसधारी कंडक्टरों की संख्या 1,000 से भी कम है।

राज्य सरकार ने इस पर जवाब देते हुए बताया कि 24 जनवरी 2025 तक प्रदेश में 14,488 पंजीकृत यात्री बसें और 7,236 स्कूल बसें थीं, जिससे कुल संख्या 21,724 होती है। इसके मुकाबले लाइसेंसधारी कंडक्टरों की संख्या 1,012 है। सरकार ने यह भी बताया कि परिवहन विभाग ने समय-समय पर संबंधित अधिकारियों को बिना लाइसेंसधारी कंडक्टर के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

शासन ने दिया कार्रवाई का ब्योरा

जनवरी 2025 में चेकपोस्टों पर बिना लाइसेंसधारी कंडक्टर के संचालित 165 बसों के खिलाफ कार्रवाई की गई, जिसमें एक लाख 67 हजार 600 रुपये का जुर्माना लगाया गया। इसके अलावा, अप्रैल 2024 से फरवरी 2025 के बीच बिना ड्राइविंग लाइसेंस और वैध दस्तावेज के चल रहे 1,61,377 वाहनों पर 19 करोड़ 77 लाख 2 हजार 700 रुपये का जुर्माना लगाया गया।

हाई कोर्ट ने यह कहा

हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता की चिंता को पूरी तरह निराधार नहीं माना और कहा कि यह मुद्दा प्रशासनिक स्तर पर संबंधित अधिकारियों के संज्ञान में है। कोर्ट ने जनहित याचिका का निराकरण करते हुए निर्देश दिया कि परिवहन अधिकारी मोटर वाहन अधिनियम, 1988 और छत्तीसगढ़ मोटर वाहन नियम, 1994 का सख्ती से पालन कराएं।

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि उसने पंजीकृत बसों और लाइसेंसधारी कंडक्टरों की संख्या को लेकर याचिकाकर्ता के दावे की सत्यता पर कोई राय नहीं दी है।

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