हादसों पर हाई कोर्ट का सख्त रुख, कलेक्टरों को फटकार

High Court takes a tough stance on accidents; reprimands Collectors.

बिलासपुर: छत्तीसगढ़ में तेजी से बढ़ते सड़क हादसों, नेशनल हाईवे पर बेसहारा मवेशियों के जमावड़े और बेलगाम ओवरलोडिंग को लेकर छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने राज्य शासन और एनएचएआई NHAI के आला अफसरों के खिलाफ बेहद कड़ा रुख अपनाया है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए पूरी व्यवस्था पर तीखी टिप्पणी की और पूछा— “क्या पुलिसकर्मियों का काम सिर्फ मवेशी हांकना है या व्यवस्था बनाना?” हाई कोर्ट ने बेकाबू मौतों के आंकड़ों पर गहरी चिंता जताते हुए एनएचएआई के रीजनल ऑफिसर, पुलिस और सभी जिला कलेक्टरों को 10 दिनों के भीतर शपथ पत्र के साथ विस्तृत कार्ययोजना पेश करने का सख्त निर्देश दिया है।

साल भर में 7 हजार मौतें, फिर भी सरगुजा-कांकेर कलेक्टर्स ने बुलाई साल में सिर्फ 1-1 बैठक

अदालत में कोर्ट कमिश्नर एडवोकेट रवींद्र शर्मा और अपूर्व त्रिपाठी द्वारा पूरे प्रदेश से जुटाए गए अधिकृत आंकड़े पेश किए गए। आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में प्रदेश में 15,484 सड़क हादसों में 6,967 लोगों की मौत हुई। वहीं वर्ष 2026 में 31 मई तक (शुरुआती 5 महीनों में) 6,891 हादसों में 3,170 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं।

आंकड़ों से स्पष्ट हुआ कि केवल सरगुजा जिले में एक साल में 300 से अधिक मौतें हुईं, फिर भी कलेक्टर की अध्यक्षता वाली जिला सड़क सुरक्षा समिति की पूरे साल में महज 1 बैठक हुई। कांकेर जिले का भी यही आलम रहा, जिस पर कोर्ट ने नाराजगी जताई।

रायपुर बना राज्य का सबसे खतरनाक ‘डेथ जोन’, 10 में से 7 ब्लैक स्पॉट्स अकेले राजधानी में

हाई कोर्ट में प्रदेश के 10 सबसे खतरनाक ब्लैक स्पॉट्स की सूची सौंपी गई, जिनमें से 7 अकेले रायपुर जिले में हैं:
सिलतरा से निको गेट धरसींवा: 1 साल में 19 मौतें।
पाली से गझरा नाला कोरबा: 22 हादसों में 17 लोगों की जान गई।
अन्य संवेदनशील क्षेत्र: रायपुर के तेलीबांधा, नेवरा, आरंग और खरोरा क्षेत्र ब्लैक स्पॉट घोषित किए गए हैं।

’10 टन की गाड़ी में 25 टन माल’, कांटा-घर बंद और हाईवे पर मवेशी

सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा ने कहा कि औद्योगिक क्षेत्रों में 10 टन क्षमता वाली गाड़ियों में 22 से 25 टन तक ओवरलोड माल लादा जा रहा है और वजन नापने वाली वेइंग मशीनें बंद पड़ी हैं।

बारिश के दिनों में नेशनल हाईवे पर बैठे मवेशियों पर नाराजगी जताते हुए सीजे ने कहा कि दिन में स्थिति जैसे-तैसे संभलती है, लेकिन रात में लोगों की जान जोखिम में रहती है। राजधानी और आसपास के हाईवे पर रोजाना हजारों वाहन गुजर रहे हैं, लेकिन पूरी व्यवस्था ‘भगवान भरोसे’ चल रही है।

हाई कोर्ट ने इन 5 प्रमुख बिंदुओं पर मांगा जवाब:

सड़क सुरक्षा समिति की अनिवार्य मासिक बैठकें नियमित क्यों नहीं बुलाई गईं?
अवैध पार्किंग और धड़ल्ले से चल रही ओवरलोडिंग को रोकने के लिए क्या कदम उठाए गए?
चिन्हित ब्लैक स्पॉट्स को सुधारने के लिए क्या तात्कालिक उपाय किए गए?
NHAI के क्षेत्रीय व प्रशासनिक अधिकारी अपनी जवाबदेही तय करते हुए रिपोर्ट पेश करें।
प्रदेश में सड़क सुरक्षा सुधारने की समयबद्ध कार्ययोजना अदालत को बताई जाए।

इस न्यायिक सुनवाई के तीन मुख्य पहलू:

प्रशासनिक उदासीनता पर प्रहार: कलेक्टर्स द्वारा सड़क सुरक्षा बैठकों को औपचारिकता मानकर टालने की आदत पर हाई कोर्ट ने सीधे सवाल खड़े किए हैं।
ओवरलोडिंग और ब्लैक स्पॉट्स: वेइंग मशीनों के बंद रहने और सड़कों पर खड़े भारी वाहनों को हादसों का मुख्य कारण माना गया है।
10 दिन की सख्त डेडलाइन: एनएचएआई और जिला प्रशासन को अब कागजी जवाब के बजाय ठोस समयबद्ध रिपोर्ट देनी होगी।

Exit mobile version