जिंदगी की भीख मांगती रही हीराबाई, गांव से बाहर मौत के भरोसे छोड़ी गई

Heera Bai kept begging for her life; she was abandoned outside the village, left to the mercy of death.

लोकेश्वर सिन्हा गरियाबंद

गरियाबंद के धींगिया मुडा गांव में गांव के बाहर एक झोपड़ी में मरने के लिए छोड़ दी गई 50 वर्षीय हीरा बाई नेताम को वो जिसे भी देखती जिंदगी की भीख मांगती थी। महिला पिछले कई साल गंभीर बीमारी से ग्रसित थी, जिसे परिवार वालो ने साल भर से इलाज कराना बंद कर दिया था। एक हाथ पांव में फोड़े हो गए जिसमें कीड़े बिल बिला रहे, फूलने के साथ असहनीय दर्द ने पीड़िता का जीना बेहाल कर दिया था। गांव वालो के ताना और रोग असाध्य और छूत बता कर गांव से बाहर रखने की माँग कर दी। फिर रिश्तों पर अंधविश्वास भारी पड़ा और बेबस पति और बेटों ने दिल में पत्थर रख कर 2जुलाई से महिला को गांव के बाहर अपने ही खेत में एक झोपड़ी बना कर छोड़ दिया। दो वक्त के खाना दे कर परिजन अपनी जवाबदारी खत्म कर ली।

मामले की सूचना जिला पंचायत अध्यक्ष गौरी शंकर को लगी, फिर उन्होंने देवभोग बीएमओ प्रकाश साहू से संपर्क कर अपने साथ एंबुलेंस लेकर पहुंचे।परिजनों को मौके पर बुलाया और उन्हें समझाइश देने के साथ ही पीड़ित को देवभोग अस्पताल में भर्ती कराया।अब महिला का उपचार चल रहा है। हैरानी की बात है कि परिजनों ने भी कई सालों से निजी अस्पतालों में उपचार कराने का दावा कर रहे, लेकिन वे सरकारी अस्पताल में चिकित्सा सेवा से जुड़ी योजनाओं का लाभ लेने परहेज क्यों किया यह अब भी पहली बना हुआ है।डॉक्टरों ने बताया कि पुराने घाव में गैंगरीन के लक्षण दिख रहा, रोग छूत की बीमारी की श्रेणी में नहीं आता, उचित उपचार के लिए मेकाहारा रेफर करने की बात कह रहे।

 

 

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