लोकेश्वर सिन्हा गरियाबंद
गरियाबंद जिला कभी लाल आतंक के साए में था, लेकिन अब नक्सलवाद खत्म होने के बाद यहां की सुंदर वादियां, झरने, वन्य प्राणियों का झुंड, ऊंचे ऊंचे पहाड़ पर्यटकों को अपनी और आकर्षित कर रहा है और पर्यटक बिना डर एवम भय के इन वादियों में सैर कर रहे है
देखिये नक्सल गढ़ के नाम से प्रसिद्ध आमामोरा से हमारे संवाददाता की ये खास रिपोर्ट……
VO — बन्दूक की आवाज से गूंजने वाला यह ऊंचे ऊंचे पहाड़ यह घना जंगल कभी कुख्यात नक्सलियों के साये में था लाल आतंक से यहां के लोग जीवन जीने को मजबूर थे यहां माओवाद अपनी सरकार चला रहे थे कई हमारे सुरक्षा बलों के जवान अपनी बलिदान दे चुके एवम यहां के रहवासी सरकार की योजनाओं से वंचित हो जाय करते थे लेकिन केंद्र व राज्य सरकार के द्वारा मिलकर नक्सल मुक्त करने के बाद यहां की पर्यटन स्थल अब उभरता जा रहा है लोग बिना डर भय के यहाँ पर पहुंच रहे है और अब यह स्थान सैलानियों से गुलजार हो रहा है पुलिस ने पहाड़ के ऊपर ओढ़ में सुरक्षा कैम्प स्थापित कर दिया है तो अब टाईगर रिजर्व के द्वारा भी सैलानीयो का दिल खोलकर स्वागत किया जा रहा है जिसके कारण बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंच रहे है आमामोरा के कारीपगार वॉटर फॉल अब सैलानियों से गुलजार हो रहा है खासकर रविवार के बाद बड़ी संख्या में पर्यटक यहाँ पहुंच रहे है लेकिन पहाड़ के ऊपर निर्माणाधीन सड़क पर वन विभाग द्वारा NOC नही देने से सड़क ही हालात खस्ताहाल है जिसके कारण वाहनों को पार करना थोड़ी चुनौती हो रही हैं अगर वन विभाग सड़क बनाने की अनुमति दे देती है तो आगामी दिनों में यहां की पर्यटन स्थल विश्व के मानचित्र में अपनी अलग पहचान बनाएंगे, लेकिन कल तक बंदूक की गूंज, लाल आतंक का साए में रहने वाला यह स्थान अब बिन डर भय के पर्यटको को स्वागत करता दिख रहा है।