छत्तीसगढ़

वन तस्करों पर वन विकास निगम की बड़ी कार्रवाई, अवैध लकड़ी से भरा ट्रैक्टर जप्त

Forest Development Corporation takes major action against forest smugglers, tractor loaded with illegal timber seized

रायपुर । छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम लिमिटेड के कवर्धा परियोजना मंडल ने वन अपराधों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए सागौन और हल्दू की लकड़ी का अवैध परिवहन कर रहे एक ट्रैक्टर को जप्त किया है। यह कार्रवाई पंडरिया परिक्षेत्र के कुकदूर क्षेत्र में की गई।

वन विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार 6 मार्च की रात लगभग 11:45 बजे वन विकास निगम की टीम संरक्षित वन क्षेत्र कक्ष क्रमांक पी एफ/1467 में गश्त कर रही थी। इसी दौरान डालामौहा से भेड़ागढ़ बैगापारा की कच्ची सड़क पर बिना नंबर प्लेट का एक संदिग्ध ट्रैक्टर आता हुआ दिखाई दिया। टीम ने घेराबंदी कर वाहन को रोका और तलाशी ली। जांच के दौरान ट्रैक्टर में सागौन और हल्दू की लकड़ी लदा हुआ पाया गया, जिसका परिवहन बिना किसी वैध दस्तावेज के किया जा रहा था।

वन विभाग ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय वन अधिनियम 1927 की धारा 33(1), 41, 42 तथा छत्तीसगढ़ वनोपज व्यापार विनियमन अधिनियम 1969 के तहत कार्रवाई करते हुए वन अपराध प्रकरण क्रमांक 18353/12 विगत 06 मार्च को दर्ज किया है।

प्राप्त कार्रवाई के दौरान स्वराज ट्रैक्टर (मॉडल 735 एफई को जप्त किया गया है, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 7.5 लाख रुपए बताई गई है। इसके अलावा ट्रैक्टर से सागौन और हल्दू की लकड़ी सहित कुल लगभग 0.667 घन मीटर वनोपज बरामद की गई है, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 40 हजार रूपए आंकी गई है। प्रकरण की सूचना प्राप्त होते ही प्राधिकृत अधिकारी एवं उपमंडल प्रबंधक, कवर्धा ने माननीय प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट को जानकारी दे दी है। साथ ही भारतीय वन अधिनियम 1927 की धारा 52(4) के तहत वाहन को राजसात (सरकारी संपत्ति घोषित) करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। वाहन की जप्ती की सूचना क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी को भी भेज दी गई है, ताकि वाहन का क्रय-विक्रय या हस्तांतरण न हो सके।

यह कार्रवाई सुनील कुमार, मंडल प्रबंधक, कवर्धा परियोजना मंडल के निर्देशन तथा दीपिका सोनवानी, उपमंडल प्रबंधक बोड़ला के मार्गदर्शन में की गई। कार्रवाई में जागेश गोंड, परियोजना परिक्षेत्र अधिकारी पंडरिया, रंजीत कुमार पटेल सहायक परियोजना क्षेत्रपाल, जसपाल सिंह मरकाम क्षेत्ररक्षक और स्थानीय सुरक्षा श्रमिकों का विशेष योगदान रहा।

वन विकास निगम ने स्पष्ट किया है कि वन क्षेत्रों में वनों की अवैध कटाई और तस्करी जैसी गतिविधियों के खिलाफ आगे भी इसी तरह सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

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