रीवा के कोल्ड स्टोरेज में लगी भीषण आग, 50 गाड़ियां जली, डेढ़ करोड़ के केले जले, मशीन और प्रिंटिंग प्रेस बनी कबाड़

सिविल लाइन थाना क्षेत्र के कॉलेज चौराहा रोड की घटना, करीब 10 घंटे के बाद पाया जा सका आग पर काबू

रीवा @ सुभाष मिश्रा। रीवा में कोल्ड स्टोरेज बिल्डिंग में लगी भीषण आग 10 घंटे बाद काबू में आ सकी। आग मंगलवार रात 12.30 बजे के आसपास लगी थी। बुधवार सुबह 11 बजे इसे बुझाया जा सका। आग में 50 गाड़ियां जल गईं। डेढ़ करोड़ के केले, मशीन और प्रिंटिंग प्रेस भी जलकर कबाड़ हो गई हैं। घटना सिविल लाइन थाना क्षेत्र के कॉलेज चौराहा रोड की है।

आग भगवान शीत भंडार नाम के कोल्ड स्टोरेज बिल्डिंग में लगी। बिल्डिंग के मालिक विजय सिंह हैं। मीडिया से बात करते हुए वे सिर्फ इतना ही कह सके कि काफी नुकसान हुआ है, इसके बाद उनकी आंखें छलक उठीं और वे बात नहीं कर सके। शुरुआती जानकारी में आग लगने का कारण शॉर्ट सर्किट बताया जा रहा है। रात से सुबह तक एक-एक कर 26 फायर ब्रिगेड की गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। सुबह 8 बजे तक लपटों पर तो काबू पा लिया गया, लेकिन राख के ढेर धधक रहे थे। इसके बाद दो बार आग फिर भड़की। ऐसे में SDRF को बुलाना पड़ा। रीवा SDRF कमांडेंट ने बताया कि उन्हें भोपाल कंट्रोल रूम से जानकारी मिली थी। आग बुझा दी गई है। जनहानि नहीं हुई, लेकिन काफी सामान जल गया।

बिल्डिंग में ऑटो पार्ट्स की दुकान खोले रहीस खान ने बताया कि पूरा नुकसान 2 करोड़ से नीचे का नहीं है। उनकी खुद की 50 गाड़ियां (टूव्हीलर – स्कूटर) जल गईं। वे इन्हें खरीदने और बनाकर बेचने का भी काम करते हैं। बाकी और लोगों का भी नुकसान हुआ है।

उन्होंने बताया, मंगलवार रात 11 बजे दुकान बंद कर घर गए थे। रात 12.30 बजे गार्ड का फोन आया। बोला- गोदाम में आग लग गई है। पूछने पर उसने बताया कि थोड़ी सी लगी है। मैं भी जब पहुंचा तो आग ज्यादा नहीं थी। तुरंत फायर ब्रिगेड को बुलाने पहुंचा। वो टाइम लगा दिए। ड्राइवर नहीं था। जब ड्राइवर आया और गाड़ी लेकर आए, तो आग कंट्रोल नहीं हुई। समझ नहीं आ रहा आग कैसे लगी। वहीं डर के कारण रातभर सो नहीं सके मोहल्ले के लोग, आग इतनी भीषण थी कि लपटें बेकाबू होती जा रही थीं। गाड़ियों चपेट में आने से टायरों में धमाके हुए। इस वजह से आग और तेजी से फैली। कोल्ड स्टोरेज बिल्डिंग के आसपास रहने वाले रातभर सो नहीं सके। राहुल टंडन का कहना है कि पेट्रोल बाइकें जल रही थीं। इस आग के कारण रातभर जागरण करना पड़ा।

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