वीरता का पर्व: अमर जवान गजरू राम मंडावी की स्मृति में खैरबना में हुआ अद्वितीय राष्ट्र समर्पण समारोह

Festival of Valor: Unique Nation Surrender Ceremony held in Khairbana in memory of immortal soldier Gajru Ram Mandavi

बालोद संवाददाता मीनू साहू

बालोद:- छत्तीसगढ़ के बालोद जिला में थाना अर्जुंदा के अंतर्गत ग्राम खैरबना में समर्पण शिक्षण समिति और समूचे ग्रामवासियों के संयुक्त सहयोग से वीर सपूत गजरू राम मंडावी स्मृति आयोजन गरिमामय माहौल में संपन्न हुआ। पूरे परिसर में “भारत माता की जय” और “जय जवान, जय हिंद” के नारे गूंजते रहे। समारोह ने ग्रामीणों में देशभक्ति और एकता की नई चेतना का संचार किया।इस अवसर की अध्यक्षता जिला पंचायत प्रमुख तारणि पुष्पेंद्र चंद्राकर ने की। गुंडरदेही क्षेत्र के विधायक मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जबकि पुरुषोत्तम चंद्राकर और अर्जुंदा थाना प्रभारी जोगिंदर साहू विशिष्ट अतिथि के रूप में मंचासीन थे। क्षेत्र के कई जनप्रतिनिधि, समाजसेवी, शिक्षाविद और ग्रामीण नागरिक बड़ी संख्या में मौजूद रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन और शहीद गजरू राम मंडावी के चित्र पर पुष्प अर्पण से हुआ।विधायक ने कहा कि “देश की रक्षा में अपने प्राणों की आहुति देने वाले जवानों का योगदान अमूल्य है। गजरू राम मंडावी जैसे अमर सैनिकों की बदौलत ही भारत की सीमाएँ सुरक्षित हैं।”

जिला पंचायत प्रमुख तारणि पुष्पेंद्र चंद्राकर ने कहा, “शहीदों की गाथाएँ नई पीढ़ी को राष्ट्र सेवा की राह दिखाती हैं। हमें उनके आदर्शों को जीवन में उतारना चाहिए।”इस दौरान सेवानिवृत्त सैनिकों और वर्तमान में सेवा दे रहे जवानों ने भी अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि, “देशभक्ति केवल सीमा पर लड़ने तक सीमित नहीं, बल्कि हर नागरिक को अपने कार्य क्षेत्र में ईमानदारी और निष्ठा से योगदान देना चाहिए। जब समाज हमारे बलिदान को आदर देता है, तो हमें गर्व और ऊर्जा दोनों मिलती हैं।” सैनिकों ने युवाओं से आग्रह किया कि वे राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखें और जीवन में अनुशासन को अपनाएँ।समारोह में बच्चों और युवाओं द्वारा देशभक्ति गीत, नृत्य और कविताएँ प्रस्तुत की गईं, जिससे वातावरण भावविभोर हो उठा। उपस्थित जनसमूह ने एक स्वर में कहा कि शहीदों की विरासत को जन-जन तक पहुँचाना हमारा नैतिक दायित्व है।समर्पण शिक्षण समिति द्वारा आयोजित यह आयोजन केवल श्रद्धांजलि नहीं बल्कि राष्ट्र चेतना, बलिदान और जनएकता का प्रतीक उत्सव सिद्ध हुआ। अंत में मौन रखकर अमर वीर गजरू राम मंडावी को नमन किया गया और “भारत माता की जय” के उद्घोष के साथ समारोह संपन्न हुआ।

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