शिकायत करने पर धमकाने का भी आरोप, 10 छात्रों ने कलेक्टर से मिलकर सौंपा समस्याओं का ब्योरा; जांच और कार्रवाई का मिला आश्वासन
बलरामपुर/ (शोएब सिद्दिकी) भेलवाडीह स्थित एकलव्य आवासीय विद्यालय के छात्र अपनी विभिन्न समस्याओं को लेकर पैदल ही जिला मुख्यालय की ओर कलेक्टर से मिलने निकल पड़े। छात्रों का कहना था कि विद्यालय में पिछले कई महीनों से शिक्षकों की कमी बनी हुई है, जिससे पढ़ाई प्रभावित हो रही है। साथ ही उन्हें भोजन, खेल मैदान की सफाई सहित अन्य मूलभूत सुविधाओं से जुड़ी परेशानियों का भी सामना करना पड़ रहा है।
रास्ते में प्रशासनिक अधिकारियों ने छात्रों को समझाइश देकर वापस विद्यालय भेज दिया। इसके बाद 10 छात्रों के प्रतिनिधिमंडल को कलेक्टर से मिलने ले जाया गया। छात्रों ने कलेक्टर चंदन संजय त्रिपाठी को विद्यालय की समस्याओं से अवगत कराया। कलेक्टर ने पूरे मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया।
छात्रों ने आरोप लगाया कि विद्यालय में दिए जाने वाले भोजन में कई बार कीड़े निकलते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पानी की टंकी की वर्षों से सफाई नहीं कराई गई है, जिससे स्वच्छ जल की समस्या बनी हुई है। छात्रों का यह भी आरोप है कि यदि कोई छात्र विद्यालय की अव्यवस्थाओं की शिकायत करता है तो उसे धमकाया जाता है।
सहायक आयुक्त आदिवासी विकास विभाग समीक्षा जायसवाल ने कहा कि बच्चे शिक्षक की कमी और अन्य समस्याओं को लेकर कलेक्टर मैडम से मिलकर अपनी बात रखे है, मैडम ने जांच कर कार्यवाही का आश्वासन दिया है।
मामले की जानकारी मिलने पर आदिवासी समाज के जिलाध्यक्ष बसंत कुजूर ने कहा कि शासन आदिवासी छात्रों की शिक्षा और बेहतर सुविधाओं के लिए प्रतिवर्ष करोड़ों रुपये खर्च करता है, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति इसके विपरीत दिखाई देती है, जिससे विभागीय मिली भगत की आशंका होती है । उनका कहना है कि जिले के कई छात्रावासों की हालत बदहाल है और इनकी नियमित निगरानी की आवश्यकता है।
वहीं क्षेत्रीय जनपद सदस्य समीर सिंह देव ने कहा कि विद्यालय में नियमित प्राचार्य नहीं होने और प्रभारी प्राचार्य के भरोसे व्यवस्था संचालित होने से लगातार अव्यवस्थाएं बनी रहती हैं। उन्होंने कहा कि यदि जिला प्रशासन नियमित प्राचार्य की नियुक्ति करता है तो विद्यालय की व्यवस्था में सुधार हो सकता है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि स्थानीय होने के कारण प्रभारी प्राचार्य को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है। साथ ही उन्होंने कहा कि आदिवासी विकास विभाग की सहायक आयुक्त का निवास विद्यालय के समीप होने के बावजूद छात्रों के अनुसार उन्होंने अब तक विद्यालय का निरीक्षण नहीं किया है, जिससे आदिवासी विकास विभाग की लापरवाही साफ झलकती है।
