छत्तीसगढ़

फर्जी खातों पर लगेगी लगाम

Fake accounts will be curbed

रायपुर। साइबर ठगी के बढ़ते मामलों के बीच रायपुर पुलिस अब उन लोगों पर नजर रखने की तैयारी में है, जो अलग-अलग बैंकों में बार-बार खाते खुलवाते हैं। इसके साथ ही हर बैंक में कानूनी मामलों के लिए अलग अधिकारी नियुक्त करने और स्थायी संपर्क नंबर जारी करने की भी तैयारी की जा रही है।

इन्हीं मुद्दों को लेकर रायपुर में सभी प्रमुख बैंकों के नोडल अधिकारियों की बैठक हुई। बैठक में साइबर अपराधों में इस्तेमाल होने वाले बैंक खातों, संदिग्ध लेन-देन और ठगी की रकम को जल्द रोकने के उपायों पर चर्चा की गई।

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि, साइबर फ्रॉड के अधिकांश मामलों में ठग फर्जी या किराए पर लिए गए बैंक खातों का इस्तेमाल करते हैं। कई मामलों में एक ही व्यक्ति अलग-अलग बैंकों में कई खाते खुलवाता है। ठगी की रकम को तेजी से एक खाते से दूसरे खाते में ट्रांसफर कर देता है।

इसी वजह से बैंकों को ऐसे खाताधारकों की पहचान कर उनकी जानकारी पुलिस के साथ साझा करने को कहा गया है।

इस बैठक में एक महत्वपूर्ण सुझाव यह भी दिया गया कि, हर बैंक में कानूनी मामलों के लिए एक नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाए। इसके अलावा लीगल विभाग के लिए स्थायी मोबाइल नंबर जारी किया जाए, जिससे अधिकारी के तबादले या बदलने के बाद भी पुलिस जांच प्रभावित न हो।

पुलिस का मानना है कि साइबर अपराधों की जांच में समय पर जानकारी नहीं मिलने से कई बार कार्रवाई में देरी होती है।

पुलिस ने बैंक अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी शाखाओं में CCTV कैमरों की जानकारी स्पष्ट रूप से प्रदर्शित की जाए। साथ ही बैंक के मुख्य प्रवेश द्वार और पिछले हिस्से में भी कैमरे लगाने पर जोर दिया गया।

इसका उद्देश्य संदिग्ध गतिविधियों की निगरानी और जरूरत पड़ने पर फुटेज की मदद से जांच को आसान बनाना है।

ठगी का शिकार होने पर सीधे 1930 पर करें शिकायत

बैठक में बैंकों को यह भी निर्देश दिया गया कि, यदि कोई व्यक्ति ऑनलाइन ठगी का शिकार होकर बैंक पहुंचता है तो उसे तुरंत साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करने या राष्ट्रीय साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराने के लिए प्रेरित किया जाए।

सभी बैंक शाखाओं में 1930 हेल्पलाइन नंबर का प्रचार-प्रसार और प्रदर्शन सुनिश्चित करने को भी कहा गया है।

नए खातों का होगा दोहरा सत्यापन

पुलिस ने नए बैंक खाते खोलने के दौरान मोबाइल नंबर और आवेदक की पहचान का भौतिक सत्यापन करने पर जोर दिया। कॉर्पोरेट खातों के मामले में खाता खुलने के 15 दिन बाद दोबारा पते का सत्यापन करने का सुझाव दिया गया है।

संदिग्ध ट्रांजेक्शन पर तुरंत होगी कार्रवाई

बैठक में Suspicious Transactions यानी संदिग्ध लेन-देन की निगरानी को लेकर भी चर्चा हुई। बैंकों से कहा गया कि संदिग्ध गतिविधियां सामने आने पर तुरंत आवश्यक कार्रवाई करें और जरूरत पड़ने पर पुलिस को सूचना दें।

बैठक में लिए गए प्रमुख फैसले

बार-बार खाते खुलवाने वाले लोगों की पहचान कर निगरानी।

हर बैंक में लीगल नोडल अधिकारी नियुक्त करने की तैयारी।

बैंक शाखाओं में CCTV व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश।

साइबर ठगी पीड़ितों को तुरंत 1930 हेल्पलाइन से जोड़ना।

नए खातों और कॉर्पोरेट खातों का सख्त सत्यापन।

संदिग्ध ट्रांजेक्शन की जानकारी पुलिस से साझा करना।

जांच के दौरान पुलिस को समय पर जानकारी उपलब्ध कराना।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button