लोकेश्वर सिन्हा, गरियाबंद
गरियाबंद। छत्तीसगढ़ के राजकीय वन भैंसे छोटू के कुनबे को बढ़ाने की कवायद अब अगले चरण में पहुंचने जा रही है। गरियाबंद के उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में रहने वाले छोटू के लिए बारनवापारा वन क्षेत्र से तीन मादा वन भैंसों को शिफ्ट करने की तैयारी की जा रही है। इन तीनों को कुछ महीनों तक छोटू के साथ विशेष बाड़े में रखा जाएगा। ताकि प्राकृतिक वातावरण में उनकी गतिविधियों पर नजर रखी जा सके। यह पूरी कवायद एक-दो दिन में तैयार नहीं हुई है। इसके पीछे वन विभाग की वर्षों की कोशिश और लंबी प्रक्रिया है। वन्यजीवों को असम से छत्तीसगढ़ लाने से लेकर यहां के वातावरण के अनुकूल बनाने तक कई चरणों में काम किया गया है। 2020 में असम से शुरू हुई थी पहल
गरियाबंद जिले के उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में राजकीय वन भैंसों की आबादी बढ़ाने के उद्देश्य से वन विभाग की टीम वर्ष 2020 में असम गई थी। वन्यजीव पशु चिकित्सक राकेश वर्मा के मुताबिक, उस दौरान टीम एक नर और एक मादा वन भैंसा लेकर आई थी। हालांकि, कोविड संक्रमण के चलते आगे की प्रक्रिया प्रभावित हुई और अभियान को अपेक्षित गति नहीं मिल सकी। इसके बाद वर्ष 2023 में वन विभाग की टीम दोबारा असम पहुंची। इस बार टीम को 15 दिनों तक वहां रुकना पड़ा जिसके बाद चार मादा वन भैंसों को छत्तीसगढ़ के बार नवापारा लाया गया। असम के जंगलों में वन भैंसों को तलाशने और सुरक्षित तरीके से पकड़ने के लिए टीम को काफी मशक्कत करनी पड़ी। वन भैंसों को ट्रेंकुलाइज करने में ही सात से आठ दिन लग गए। इसके बाद उन्हें करीब एक महीने तक बोमा में रखा गया, ताकि वे कृत्रिम आहार खाने की अभ्यस्त हो सकें। फिर लगभग 1700 किलोमीटर की दूरी तय कर इन्हें दो दिनों में छत्तीसगढ़ लाया गया। तब से इन वन भैंसों को बारनवापारा वन क्षेत्र में रखा गया है। मौसम और प्रजनन के अनुकूल बनाने के लिए किया इंतजार तीन मादा वन भैंसों को इतने लंबे समय तक बारनवापारा में रखने की वजह को लेकर वन्यजीव पशु चिकित्सक राकेश वर्मा ने बताया कि वन भैंसों को नए वातावरण और मौसम के अनुकूल होने में समय लगता है। साथ ही, प्रजनन के लिए अनुकूल परिस्थितियां तैयार करना भी जरूरी है। वन विभाग के अनुसार, वर्तमान में बारनवापारा वन क्षेत्र में कुल 16 वन भैंसे हैं। इनमें से तीन मादा वन भैंसों को अब उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में शिफ्ट करने की तैयारी है। इनका उद्देश्य छोटू के साथ प्रजनन की संभावनाओं को आगे बढ़ाना और प्रदेश में राजकीय वन भैंसों के संरक्षण के प्रयासों को मजबूत करना है।
कुछ महीने छोटू के साथ रहेंगी, फिर जंगल में छोड़ने की योजना उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में तीनों मादा वन भैंसों के लिए विशेष बाड़ा तैयार किया जा रहा है। योजना के अनुसार, इन्हें कुछ महीनों तक छोटू के साथ एक ही बाड़े में रखा जाएगा। इसके बाद इनके गले में ट्रैकर लगाकर जंगल में छोड़ने की योजना है। ट्रैकर के माध्यम से जंगल में छोड़े जाने के बाद भी उनकी गतिविधियों की निगरानी की जा सकेगी। छत्तीसगढ़ का राजकीय वन भैंसा राज्य की प्राकृतिक विरासत का अहम हिस्सा है। ऐसे में छोटू के साथ मादा वन भैंसों को रखने और बाद में उन्हें प्राकृतिक आवास में छोड़ने की यह पहल संरक्षण की दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अब सबकी निगाहें इस बात पर जब कुछ दिनों के अंदर तीनों मादा वन भैंसों को उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में शिफ्ट किया जाता है और संरक्षण की यह योजना आगे किस तरह बढ़ती है। वन विभाग की कोशिश है कि छोटू के कुनबे को बढ़ाने के साथ-साथ राजकीय वन भैंसों की आने वाली पीढ़ियों के संरक्षण का रास्ता भी मजबूत किया जा सके।