छत्तीसगढ़

नशे में शिक्षा! तेतलपारा स्कूल में 122 बच्चों का भविष्य दांव पर

Education in addiction! Future of 122 children at stake in Tetalpara school

लोकेश्वर सिन्हा, गरियाबंद
गरियाबंद । सरकारी स्कूलों में बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ की बानगी मैनपुर ब्लॉक  झर गांव के तेतल पारा प्राथमिक शाला में साफ देखी जा सकती है। 122 बच्चों वाला यह स्कूल जर्जर भवन, असुरक्षित बरामदे और शराब के नशे में धुत प्रधान पाठक के सहारे चल रहा है।
स्कूल भवन के दो कमरे पूरी तरह खस्ताहाल हैं। पढ़ाई, खेलकूद और मध्यान्ह भोजन सब कुछ एक ही बरामदे में चलता है, जहाँ न बैठने की सुविधा है, न सुरक्षा का इंतजाम। बारिश या धूप, बच्चों को दिनभर इसी असुरक्षित जगह में रहना पड़ता है।
स्कुल मे ज़ब हमारी टीम पहुंची तो प्रधान पाठक देवनारायण सिंह गैरहाजिर थे। बुलाने पर वे नशे में लड़खड़ाते हुए आए और पत्रकारों से अभद्रता की। चौंकाने वाली बात यह कि वे मुख्यमंत्री, राज्यपाल, प्रधानमंत्री तक के नाम नहीं बता सके। पढ़ाने की कोशिश में भी बच्चे उनकी ओर न देखकर दूसरी दिशा में बैठे रहे।
बच्चों ने भी खुलकर कहा– शिक्षक रोज नशे में आते हैं।
इस पर प्रधान पाठक ने पत्रकारों के सामने ही उन्हें डांटना शुरू कर दिया। ब्लॉक शिक्षा अधिकारी महेश कुमार पटेल ने केवल जांच का भरोसा दिया।
तेतल पारा ही नहीं, मैनपुर ब्लॉक के 40–45 स्कूल जर्जर हालत में हैं। कहीं बच्चे तबेलों में पढ़ते हैं, तो कहीं पंचायत भवनों में
सरकार के स्मार्ट एजुकेशन और नशा मुक्ति अभियान कागजों में ही सीमित हैं।
अब सवाल यह है–  
क्या नशे में डूबा शिक्षक बच्चों का भविष्य बना सकता है?
क्या विभाग केवल जांच के नाम पर जिम्मेदारी टाल देगा?
तेतल पारा स्कूल आज प्रदेश के लिए एक आईना है– जो शिक्षा तंत्र की हकीकत और बच्चों के भविष्य पर मंडराते खतरे को साफ दिखा रहा है।

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