तेंदूपत्ता व्यापार में धमतरी की बढ़ती मांग, आंध्र, यूपी और बंगाल की फर्मों ने किया सौदा

Dhamtari sees growing demand in tendu leaf trade, with firms from Andhra, UP and Bengal signing deals.

धमतरी। जिले के तेंदूपत्ता की मांग उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल व आंध्रप्रदेश में भी है। यहां की फर्म धमतरी के तेंदूपत्ता की खरीदी करेंगी। इसके लिए तैयारियां हो गई हैं। जिले में 26 हजार 800 मानक बोरा तेंदूपत्ता संग्रहण का लक्ष्य है।

संग्रहण के बाद इन राज्यों की फर्म तेंदूपत्ता खरीदकर ले जाएंगी। इसके लिए शासन स्तर से टेंडर की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है।
हर साल करोड़ों रुपये के तेंदूपत्ता का व्यवसाय होता है

धमतरी जिले के जबर्रा, मारागांव, सिंगपुर, बरबांधा, डोकाल और चनागांव के तेंदूपत्ता को उच्चक्वॉलिटी का माना जाता है। धमतरी जिले से हर साल करोड़ों रुपये के तेंदूपत्ता का व्यवसाय होता है। वन विभाग के अनुसार बूटा कटाई का कार्य कर लिया गया है। एक मई से जिले में तेंदूपत्ता तोड़ाई का कार्य शुरू हो जाएगा। इसके लिए रूप-रेखा बना ली गई है।

इस साल 26,800 मानक बोरा तेंदूपत्ता संग्रहण का लक्ष्य

वन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार इस साल जिले में 26,800 मानक बोरा तेंदूपत्ता संग्रहण का लक्ष्य रखा गया है। 27 समितियों के 27 हजार 872 संग्राहक इसे संग्रहित करेंगे। इसके बाद संग्रहित तेंदूपत्ता को छत्तीसगढ़ के अलावा उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और आंध्रप्रदेश की फर्म खरीदी करेंगी। इसके लिए बकायदा टेंडर पास भी हो चुका है और फर्माें ने 10 प्रतिशत राशि शासन के मद में जमा भी करा दी है।

पिछले साल छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ को 20 करोड़ तीन लाख रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ था। इसमें से 13 करोड़ की राशि संग्राहकों को वितरित किया गया था।
बेमौसम बारिश का मंडराता रहता है खतरा

तेंदूपत्ता संग्रहण के लिए तोड़ाई का कार्य जैसे ही अंचल में शुरू होता है, तो बेमौसम बारिश का सबसे ज्यादा खतरा मंडराता रहता है। बारिश होती है, तो तोड़ाई का कार्य प्रभावित हो जाता है। सूखाने में दिक्कतें होती हैं। इसलिए तेंदूपत्ता संग्रहण का लक्ष्य पिछड़ जाता है।

Exit mobile version