छत्तीसगढ़

भिलाई में पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की एक झलक पाने उमड़े श्रद्धालु

Devotees gathered in Bhilai to get a glimpse of Pandit Dhirendra Krishna Shastri.

लोकेशन भिलाई 

रिपोर्टर जस्सू 

भिलाई जब तक इस देश से अंधविश्वास खत्म नहीं हो जाता में दिव्य दरबार लगाता रहूंगा

– गुरुवार की दोपहर पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की दिव्य श्री हनुमंत कथा प्रारंभ हुई। प्रथम दिन उनके दर्शन व कथा श्रवण के लिए श्रद्धालुओं का जन सैलाब उमड़ा। जिससे इस्पात नगरी श्रद्धा व भक्ति से सराबोर रहा। दिव्य श्री हनुमंत कथा प्रारंभ के पहले बागेश्वरधाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री मीडिया से रूबरू हुए। उन्होंने अपने चिरपरिचित अंदाज में मीडिया के सवालों का बेबाकी से जवाब दिया। चर्चा में पंडित श्री शास्त्री ने कहा कि हिंदुत्व के लिए जीना व मरना यही सच्चा धर्म है। सनातन की स्थापना होनी चाहिए। गौमाता को राष्ट्र माता का दर्जा मिलेगा, तब भारत हिंदू राष्ट्र बनेगा। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश में हिंदुओं को हिंसक घटनाओं का सामना करना पड़ रहा है। ये यह बताता है कि बांग्लादेश में हिंदुओं का होना गुनाह है। अगर हम अभी इन सब घटनाओं से सीख नहीं लेंगे, तो भविष्य में भारत में भी हिंदू होना गुनाह होगा। वर्तमान समय हिंदू राष्ट्र निर्माण का सही समय है।

– एक सवाल के जवाब में पंडित शास्त्री ने कहा कि हिंदुओं को जोड़ना और राष्ट्रवाद जगाना अगर अंधविश्वास है, तो ऐसी मानसिकता रखने वाले लोगों को देश छोड़ देना चाहिए। देश की उन्नति जात-पात से नहीं बल्कि राष्ट्रवाद से होगी। पंडित श्री शास्त्री जी ने धर्मांतरण से जुड़े एक सवाल के जवाब में कहां की धर्मांतरण का मुख्य कारण अशिक्षा, अंधविश्वास व प्रलोभन है। इसे शिक्षा और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों की आर्थिक मदद कर दूर किया जा सकता है। अंधविश्वास दूर करने के लिए मैं हूं। जब तक इस देश से अंधविश्वास खत्म नहीं हो जाता, मैं दिव्य दरबार लगाता रहूंगा।

– उन्होंने कहा कि धर्मांतरित लोग जो अपनी स्वेच्छा से सनातन अपनाना चाहते हैं, उन्हें वे 27 दिसंबर को दिव्य दरबार में घर वापसी करवाएंगे। सनातन के ध्वजवाहक पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि सनातन की जागृति और हिंदू राष्ट्र निर्माण को लेकर वे छत्तीसगढ़ में भी पदयात्रा करेंगे। यह पद यात्रा कहां से और कब शुरू होगी इसकी सूचना आगामी समय में दी जाएगी। पंडित शास्त्री जी ने कहा कि छत्तीसगढ़ में मेरा आना लगा रहता है। भिलाई में मेरा आना सौभाग्य है।

 

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