लोकेशन – रीवा मप्र रिपोर्टर सुभाष मिश्रा
रीवा। महाशिवरात्रि पर प्रस्तावित शिव बारात के प्रचार से जुड़े पोस्टर हटाए जाने को लेकर उपजे विवाद पर रीवा नगर निगम के महापौर अजय मिश्रा ‘बाबा’ ने सार्वजनिक रूप से खेद व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि नगर निगम की किसी भी कार्रवाई या चूक से यदि किसी की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं, तो निगम इसके लिए क्षमाप्रार्थी है।
महापौर ने स्पष्ट किया कि पोस्टर हटाने की कार्रवाई नगर निगम आयुक्त के निर्देश पर की गई थी। उन्होंने इस कदम को गलत बताते हुए कहा कि बिना पूर्व सूचना के इस तरह की कार्रवाई से अनावश्यक विवाद और असंतोष की स्थिति बनी।
2 फरवरी को हटाए गए पोस्टर, बढ़ा विवाद
महापौर कार्यालय से जारी जानकारी के अनुसार, शिव बारात आयोजन के प्रचार हेतु लगाए गए पोस्टर-बैनर 2 फरवरी को हटाए गए थे। इसके बाद आयोजकों में नाराजगी देखी गई और शहर में तनाव का माहौल बन गया। मामला तूल पकड़ने पर नगर निगम स्तर पर पूरे घटनाक्रम की समीक्षा शुरू की गई।
अनुमति नहीं थी तो पहले नोटिस देना चाहिए था
महापौर कार्यालय की ओर से नगर निगम आयुक्त को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि यदि आयोजकों ने मध्यप्रदेश आउटडोर मीडिया नियमों के तहत अनुमति नहीं ली थी, तो नियमानुसार पहले नोटिस जारी किया जाना चाहिए था। बिना पूर्व सूचना के सीधे पोस्टर हटाने की कार्रवाई नगर निगम के हित में उचित नहीं मानी जा सकती।
चयनात्मक कार्रवाई पर उठे सवाल
पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि इससे पहले शहर में धार्मिक, राजनीतिक और व्यक्तिगत कार्यक्रमों के कई बैनर-पोस्टर लंबे समय तक लगे रहे। यदि वे भी बिना अनुमति लगाए गए थे, तो उनके खिलाफ क्या कार्रवाई की गई। एक ही आयोजन को लक्षित किए जाने पर आपत्ति जताई गई है और भविष्य में ऐसी स्थिति की पुनरावृत्ति न हो, इसके निर्देश दिए गए हैं।
वीडियो सामने आने से माहौल और संवेदनशील
घटना के बाद कांग्रेस प्रदेश महासचिव एवं शिव बारात आयोजन से जुड़े मनीष गुप्ता का एक वीडियो सामने आया, जिसमें वे भावुक नजर आए। वीडियो के बाद समर्थकों और आम लोगों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आईं।
जांच शुरू, दो दिन में मांगी रिपोर्ट
महापौर अजय मिश्रा बाबा ने नगर निगम आयुक्त को पत्र लिखकर कार्रवाई को गलत और असंवैधानिक बताया है। उन्होंने कहा कि वर्षों से चली आ रही धार्मिक परंपरा में इस तरह का हस्तक्षेप सामाजिक सौहार्द को नुकसान पहुंचाने वाला है। महापौर ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दो दिन के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी, ताकि नियमों का पालन भी हो और शहर में धार्मिक एवं सामाजिक सौहार्द बना रहे।
