देवीचरण ठाकुर
देवभोग (गरियाबंद)। देवभोग ब्लॉक के बरकानी पंचायत में इन दिनों भ्रष्टाचार चरम सीमा पर है। ग्राम सरकार ने 15वें वित्त और मनरेगा जैसे ग्राम विकास मदों में भारी गड़बड़ी की है। 15वें वित्त से गौठान पहुँच मार्ग में 77 ट्रिप मुरमीकरण का कार्य दिखाया गया है, लेकिन हकीकत यह है कि जमीन पर एक इंच भी काम नजर नहीं आता। मनरेगा के तहत कराए जाने वाले सोख्ता गड्ढा और पचरी निर्माण कार्य भी कागजों तक सीमित रह गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इन योजनाओं में बड़े पैमाने पर हेराफेरी हुई है, लेकिन स्थानीय प्रशासन की उदासीनता और निगरानी के अभाव में भ्रष्टाचारियों के हौसले बुलंद हैं।
संदिग्ध बिल-वाउचर से खुले राज
बरकानी पंचायत में भ्रष्टाचार की जड़ इतनी गहरी है कि चालू वित्तीय वर्ष में कराए गए लगभग सभी कार्यों में संदिग्ध बिल-वाउचर लगाए गए। जांच में सामने आया कि जिन फर्मों के नाम पर बिल लगाए गए हैं, न तो उनका कोई अस्तित्व है और न ही उनके पास सामग्री उपलब्ध थी। इसके बावजूद कागजों में भुगतान दिखाकर लाखों रुपये निकाले गए।
सीसी सड़क पर हुआ खेल
सीसी सड़क पर मुरमीकरण कार्य भी भ्रष्टाचार की कहानी खुद बयान कर रहा है। पंचायत सरकार ने यहां मुरमीकरण दिखाया, लेकिन वास्तव में कहीं भी काम नजर नहीं आता। सचिव का गृहग्राम होने और सरपंच का प्रभाव इतना है कि गांव के लोग भी भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने से डरते हैं।
जर्जर भवन में पंचायत संचालन
बरकानी पंचायत का संचालन आज भी 25 साल पुराने जर्जर भवन से किया जा रहा है। पंचायत ने बिजली फिटिंग और फर्नीचर के नाम पर हजारों रुपये खर्च दिखाए हैं, लेकिन इनका कोई व्यावहारिक उपयोग ग्रामीणों को नहीं मिल रहा। दूसरी ओर सरपंच पवन यादव भ्रष्टाचार न होने के दावे कर रहे हैं, लेकिन जमीन पर हालात इन दावों को झुठलाते हैं।
ग्रामीणों में आक्रोश, प्रशासन मौन
ग्रामीणों का आरोप है कि सरपंच–सचिव की मिलीभगत से पंचायत की योजनाओं में बड़े पैमाने पर हेराफेरी हो रही है। काम कागजों में पूरे दिखाए जा रहे हैं जबकि हकीकत में गांववाले बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। सवाल यह है कि आखिर स्थानीय प्रशासन कब तक चुप रहेगा और इस मामले पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है।
अब देखना होगा कि बरकानी पंचायत में फैले इस बड़े भ्रष्टाचार पर जिला प्रशासन कब संज्ञान लेता है और जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई करता है।
