छत्तीसगढ़

नाबालिग से दुष्कर्म के दोषी को 20 साल की सजा

Convict sentenced to 20 years for raping a minor

रायपुर । राजधानी रायपुर के खमतराई थाना क्षेत्र में 13 साल 11 महीने की लड़की से रेप के मामले में स्पेशल पॉक्सो कोर्ट ने आरोपी मुनेंद्र ध्रुव को दोषी ठहराते हुए 20 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है।

पीड़िता कक्षा 6वीं की छात्रा थी। प्रथम फास्ट ट्रैक स्पेशल पॉक्सो कोर्ट के जज अच्छेलाल काछी ने यह सजा सुनाई। पीड़िता की ओर से विशेष लोक अभियोजक डालेश्वर साहू ने पैरवी की।

घर से बिना बताए निकली थी नाबालिग

रिकॉर्ड के मुताबिक, 10 दिसंबर 2025 की शाम करीब 7 बजे नाबालिग घर से बिना बताए चली गई थी। परिवार ने आसपास और रिश्तेदारों के यहां उसकी तलाश की, लेकिन उसका पता नहीं चला। इसके बाद 11 दिसंबर को उसकी मां ने खमतराई थाने में सूचना दी।

पुलिस ने गुम इंसान की रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू की। 12 दिसंबर को नाबालिग अपनी मां के साथ थाने पहुंची। पुलिस ने उसका बरामदगी पंचनामा तैयार किया। इसके बाद 13 दिसंबर को उसका मेडिकल परीक्षण कराया गया।

10 दिसंबर को हुआ था रेप

अभियोजन के अनुसार, 10 दिसंबर की रात नाबालिग घर के पास स्थित नाश्ते की दुकान पर भजिया खाने गई थी। इसी दौरान आरोपी मुनेंद्र ध्रुव ने उसे इशारा कर बुलाया और अपने घर ले गया। आरोप है कि वहां आरोपी ने नाबालिग के साथ तीन बार दुष्कर्म किया।

अगले दिन सुबह करीब 4 बजे आरोपी ने उसे घर जाने के लिए कहा। नाबालिग आसपास घूमती रही और शाम करीब 6 बजे घर पहुंची। इसके बाद उसकी मां उसे खमतराई थाने लेकर गई।

आरोपी पहले से जानता था, शादी का झांसा देने का आरोप

नाबालिग और आरोपी एक-दूसरे को पहले से जानते थे और उनके बीच बातचीत होती थी। आरोपी नाबालिग से कहता था कि वह उससे प्यार करता है और उससे शादी करेगा। इसके बाद दोनों के बीच मेलजोल बढ़ गया।

कोर्ट रिकॉर्ड के अनुसार, 20 अगस्त 2025 को नाबालिग के माता-पिता काम पर गए थे, जबकि उसकी दादी भी घर से बाहर गई थी। इसी दौरान आरोपी नाबालिग को अपने घर ले गया। आरोप है कि वहां उसने नाबालिग के साथ जबरन शारीरिक संबंध बनाए।

पीड़िता को 5 लाख रुपए मुआवजा देने की अनुशंसा

कोर्ट ने पीड़िता को हुई शारीरिक और मानसिक क्षति के साथ पुनर्वास को देखते हुए 5 लाख रुपए प्रतिकर देने की अनुशंसा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, रायपुर से की है।

कोर्ट ने कहा कि पीड़िता को हुई शारीरिक-मानसिक पीड़ा और घटना के मनोवैज्ञानिक प्रभाव को देखते हुए प्रतिकर दिया जाना उचित है। यदि पीड़िता को पहले कोई अंतरिम क्षतिपूर्ति दी गई है तो उसे 5 लाख रुपए की राशि में समायोजित किया जाएगा।

आरोपी ने आरोपों से किया था इनकार

मामले की सुनवाई के दौरान आरोपी ने अपने ऊपर लगे आरोपों से इनकार किया था और ट्रायल का सामना किया। बचाव पक्ष ने आरोपी की उम्र करीब 22 साल होने, गरीब मजदूर होने और पहले किसी मामले में दोषसिद्धि नहीं होने का हवाला देते हुए न्यूनतम सजा देने की मांग की थी।

कोर्ट ने साक्ष्यों और दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आरोपी को दोषी ठहराया।

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