स्वास्थ्य केंद्र की जमीन पर घमासान: ग्राम पंचायत बसरेही में अनशन पर बैठे ग्रामीण.. कब्जे और अधिकारियों की मिलीभगत के आरोप, SDM को सौंपा ज्ञापन

Conflict over health center land: Villagers sit on hunger strike in Gram Panchayat Basrehi, allege encroachment and collusion of officials, memorandum submitted to SDM

रीवा, मप्र | रिपोर्टर – सुभाष मिश्रा

रीवा जिले के जवा क्षेत्र की ग्राम पंचायत बसरेही में उपस्वास्थ्य केंद्र निर्माण की जमीन को लेकर विवाद गहरा गया है। शासकीय भूमि पर अवैध कब्जे और प्रशासनिक लापरवाही का आरोप लगाते हुए ग्रामीणों ने अनुविभागीय दंडाधिकारी (SDM) जवा को लिखित शिकायत सौंप दी है। नाराज ग्रामीण पिछले दस दिनों से आमरण अनशन पर बैठे हैं, जिससे गांव में आक्रोश का माहौल बना हुआ है।

 

ग्रामीणों के अनुसार आराजी क्रमांक 174, रकबा 0.466 हेक्टेयर भूमि वर्ष 1959 से लेकर 2021–22 तक राजस्व अभिलेखों में शासकीय भूमि के रूप में दर्ज रही है। उनका कहना है कि इस भूमि पर न तो पहले कभी आबादी दर्ज थी और न ही इसे गांव गटन की श्रेणी में रखा गया था। बावजूद इसके कुछ लोगों ने जमीन पर बाड़बंदी कर वाड़ी लगाकर कब्जा कर लिया। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि वर्ष 2022–23 में पटवारी और तहसीलदार की मिलीभगत से इस भूमि को गांव गटन दर्ज करा दिया गया, जबकि मौके पर किसी प्रकार की वास्तविक आबादी नहीं है। ग्रामीणों का कहना है कि करीब दो वर्ष पहले इसी भूमि पर उपस्वास्थ्य केंद्र भवन निर्माण को स्वीकृति मिली थी और ग्रामसभा में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर इसी स्थान पर निर्माण कराने की मांग की गई थी। अप्रैल 2025 में निर्माण कार्य के लिए लेआउट बनाकर जेसीबी से गड्ढे भी खोदे गए थे, लेकिन आरोप है कि कब्जाधारियों ने रात के समय गड्ढों में पानी भरकर उन्हें पाट दिया, जिससे निर्माण कार्य रुक गया।

 

ग्रामीणों ने बीएमओ राघवेन्द्र सिंह पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि बीएमओ ने तहसीलदार और पटवारी से मिलकर स्वास्थ्य भवन का निर्माण तय स्थान से हटाकर ग्राम भिरारी में शुरू करा दिया। इसकी जानकारी मिलने पर ग्रामीणों ने अतरैला थाना को सूचना देकर मौके पर पहुंचकर निर्माण कार्य रुकवा दिया। ग्रामीणों के अनुसार 17 फरवरी 2025 को तहसीलदार जवा को आवेदन देकर आराजी नंबर 174 का सीमांकन कराकर स्वास्थ्य भवन निर्माण की मांग की गई थी, लेकिन करीब एक वर्ष बीत जाने के बाद भी सीमांकन नहीं कराया गया। वहीं 9 मार्च 2026 को दोबारा जानकारी देने के बावजूद अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।

 

मामले को लेकर ग्रामीणों ने बीएमओ राघवेन्द्र सिंह को पद से हटाने की मांग भी उठाई है। उनका कहना है कि आमरण अनशन की सूचना प्रशासन को पहले ही दी जा चुकी है, लेकिन अब तक कोई जिम्मेदार अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा।

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