लापता बच्चों के मामले में छत्तीसगढ़ छठवें स्थान पर, 5 साल में 400 से ज्यादा बच्चों का सुराग नहीं
Chhattisgarh ranks sixth in the number of missing children, with over 400 children missing in the last five years.

रायपुर। छत्तीसगढ़ में बच्चों के लापता होने के मामले चिंता का विषय बने हुए हैं। पांच वर्षों के दौरान प्रदेश से 400 से अधिक बच्चों का अब तक कोई सुराग नहीं मिला है। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की मिसिंग चिल्ड्रन रिपोर्ट में यह तथ्य सामने आया है कि बच्चों के गायब होने के मामलों में छत्तीसगढ़ देश में छठवें स्थान पर है।
चिंताजनक बात यह है कि पांच वर्ष से प्रदेश लगातार देश के टाप-10 राज्यों की सूची में बना हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार इस सूची में पश्चिम बंगाल पहले और मध्य प्रदेश दूसरे स्थान पर है।
वहीं छत्तीसगढ़ में कुछ जिले ऐसे हैं जहां से बच्चों के गायब होने की घटनाएं अपेक्षाकृत अधिक दर्ज की गई हैं। प्रदेश में जांजगीर-चांपा जिला बच्चों के लापता होने के मामलों में सबसे आगे है।
इसके बाद रायपुर, बिलासपुर, सक्ती, दुर्ग और बलौदाबाजार जिले का नाम सामने आया है। इन जिलों में पुलिस और प्रशासन बच्चों की तलाश के लिए लगातार अभियान चला रहे हैं।
ऑपरेशन मुस्कान के तहत अब तक प्रदेशभर से 559 बच्चों को परिवारों तक पहुंचाया जा चुका है। इनमें सबसे ज्यादा जांजगीर-चांपा जिले के बच्चे शामिल हैं। पुलिस अधिकारियों के अनुसार रायपुर और बिलासपुर जैसे बड़े शहरों में औद्योगिक गतिविधियां और शहरीकरण बढ़ रहा है।
यहां बड़ी संख्या में प्रवासी परिवार आते-जाते रहते हैं। कई बार उनके बच्चे भटक जाते हैं और दूसरे शहरों तक पहुंच जाते हैं। हालांकि बच्चों के गायब होने के पीछे एक बड़ा कारण मानव तस्करी भी माना जा रहा है।
पुलिस का कहना है कि कुछ संगठित गिरोह बच्चों को बड़े शहरों में ज्यादा पैसों का लालच देकर या अन्य प्रलोभन देकर अपने साथ ले जाते हैं। बाद में उन्हें दूसरे शहरों में मजदूरी या छोटे-मोटे कामों में लगा दिया जाता है।



