छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट से याचिकाकर्ता को राहत, रेलवे की कार्रवाई पर फिलहाल रोक
Chhattisgarh High Court grants relief to petitioner, stays railway action for now

बिलासपुर। हाई कोर्ट ने दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे द्वारा की जा रही बेदखली की कार्रवाई के खिलाफ दायर याचिका पर अपना अंतरिम स्थगन आदेश आगामी सुनवाई तक के लिए बढ़ा दिया है। कोर्ट ने याचिकाकर्ता पक्ष की अनुपस्थिति के बावजूद उनके विधिक संरक्षण को ध्यान में रखते हुए अंतरिम राहत को बरकरार रखा है।
यह मामला टीकम दास निचलानी द्वारा रेलवे के खिलाफ दायर रिट याचिका से जुड़ा है। ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान हुई विशेष सुनवाई में याचिकाकर्ता की ओर से कोई वकील उपस्थित नहीं हुआ। दूसरी ओर, रेलवे की तरफ से डिप्टी सॉलिसिटर जनरल रमाकांत मिश्रा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उपस्थित हुए।
रेलवे ने कोर्ट में स्थगन आदेश को हटाने के लिए आवेदन पेश किया और याचिका के टिकाऊपन पर गंभीर कानूनी आपत्ति उठाई। रेलवे के वकीलों ने दलील दी कि याचिकाकर्ता के पास सार्वजनिक परिसर (अनधिकृत अधिभोगियों की बेदखली) अधिनियम, 1971 के तहत वैधानिक उपचार पहले से ही उपलब्ध है, और वे इसका उपयोग भी कर चुके हैं। ऐसी स्थिति में सीधे हाई कोर्ट में रिट याचिका दायर करना नियमों के अनुकूल नहीं है। न्यायालय ने दोनों पक्षों की विधिक स्थिति को देखते हुए मामले की अगली सुनवाई 16 जून तय की है, तब तक रेलवे की कार्रवाई पर रोक जारी रहेगी।
केश की मुख्य बातें—
रोक आगामी सुनवाई तक बढ़ी: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (SECR) द्वारा की जा रही बेदखली की कार्रवाई के खिलाफ दायर याचिका पर अपना अंतरिम स्थगन आदेश (Stay Order) आगे बढ़ा दिया है।
वकील की गैरमौजूदगी में राहत: ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान हुई विशेष सुनवाई में याचिकाकर्ता टीकम दास निचलानी की ओर से कोई वकील उपस्थित नहीं हुआ, फिर भी कोर्ट ने उनके विधिक संरक्षण को देखते हुए राहत बरकरार रखी।
रेलवे ने स्टे हटाने की मांग की: वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े रेलवे के डिप्टी सॉलिसिटर जनरल रमाकांत मिश्रा ने कोर्ट में आवेदन पेश कर स्थगन आदेश को तुरंत हटाने की पुरजोर मांग की।
वैकल्पिक उपचार का तर्क: रेलवे ने दलील दी कि याचिकाकर्ता के पास सार्वजनिक परिसर (बेदखली) अधिनियम, 1971 के तहत पहले से ही वैधानिक कानूनी रास्ते उपलब्ध हैं, इसलिए सीधे हाई कोर्ट में रिट याचिका दायर करना गलत है।



