हाथी ऐप की देशव्यापी सफलता के बाद छत्तीसगढ़ का पहला सुपर ड्रोन तैनात

Chhattisgarh deploys first super drone after nationwide success of Haathi app

लोकेश्वर सिन्हा, गरियाबंद 

 

गरियाबंद, हाथी ऐप की देशव्यापी सफलता के बाद, गरियाबंद का उदंती सीता नदी टाइगर रिजर्व एक बार फिर चर्चा में है। उपनिदेशक वरुण जैन के नेतृत्व में अब यहां छत्तीसगढ़ का पहला सुपर ड्रोन तैनात किया गया है, जो न सिर्फ हाथियों की लंबाई-चौड़ाई नापेगा बल्कि रात के अंधेरे में भी उनकी सटीक लोकेशन बताएगा

 

गरियाबंद जिला मुख्यालय से 70 किलोमीटर दूर, आमामोरा ओढ़ की दुर्गम पहाड़ियों पर हाथी मित्र दल के साथ वन विभाग की टीम पहुँची है। यह वही इलाका है जहां हाथियों का बसेरा है। हाथी ऐप के जरिए देशभर में मिसाल पेश करने वाले डीएफओ वरुण जैन अब तकनीक का एक और नवाचार लेकर जमीन पर उतरे हैं।आमामोरा की उन पहाड़ियों पर, जहां पहुंचना आम इंसानों के लिए बड़ी चुनौती है। लेकिन तकनीक के पंख अब इन दूरियों को मिटाने वाले हैं। वन विभाग की टीम और अत्याधुनिक ड्रोन, जो आज से गरियाबंद के जंगलों की सुरक्षा और वन्यजीवों की निगरानी का नया चेहरा बनने जा रहा है। जैसे ही वरुण जैन ने रिमोट कंट्रोल संभाला, छत्तीसगढ़ का यह पहला उन्नत ड्रोन आसमान की ऊंचाइयों को छूने लगा। इस ड्रोन की खासियत इसकी सटीकता है। स्क्रीन पर साफ दिख रहा है कि नीचे तालाब में हाथी अठखेलियां कर रहे हैं। थर्मल इमेजिंग की मदद से यह ड्रोन घने जंगलों और रात के अंधेरे में भी हाथियों को ढूंढ निकालने में सक्षम है। आज इसी तकनीक की मदद से 28 हाथियों के दल में से दो हाथियों की लंबाई, चौड़ाई और शारीरिक मापदंडों का डेटा पल भर में एकत्र कर लिया गया। यह ड्रोन हमारे लिए गेम चेंजर साबित होगा। इससे न केवल कर्मचारियों का कीमती समय बचेगा, बल्कि हम हाथियों से होने वाली फसल हानि का सटीक आकलन और वन्यजीवों की सेहत की जानकारी बिना उनके करीब जाए ले सकेंगे। थर्मल सेंसर की वजह से रात में हाथियों की लोकेशन ट्रैक करना अब बहुत आसान हो जाएगा। वन विभाग के लिए यह तकनीक एक सुरक्षा कवच की तरह है, जो मानव-हाथी द्वंद को कम करने में भी बड़ी भूमिका निभाएगी। हाथी ऐप के बाद अब इस हाई-टेक ड्रोन ने यह साबित कर दिया है कि अगर इच्छाशक्ति हो, तो सीमित संसाधनों में भी गरियाबंद जैसा इलाका पूरे देश को नई राह दिखा सकता है।

 

 

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