छत्तीसगढ़

मासूम से दरिंदगी: दोषी मामा को अदालत ने सुनाई उम्रकैद

Brutality against an innocent: Court sentences guilty uncle to life imprisonment

अंबिकापुर। बालिका से लैंगिक उत्पीड़न के प्रकरण में रिश्ते के मामा को मृत्यु पर्यंत कारावास की सजा दी गई है। यह निर्णय अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश फ़ास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट (पाक्सो एक्ट) कमलेश जगदल्ला की अदालत ने सुनाया है। पीड़िता को पांच लाख रुपये की आर्थिक सहायता राशि उपलब्ध कराने का आदेश भी न्यायालय ने दिया है।

प्रकरण सरगुजा जिले के अंबिकापुर कोतवाली थाना क्षेत्र से जुड़ा हुआ है। पीड़िता और आरोपित का घर अगल-बगल ही है। पीड़िता के माता-पिता जब बाजार या कहीं और जाते थे तो आरोपित को ही देखभाल का जिम्मा दिया जाता था। पीड़िता और उसके तीन अन्य भाई-बहन उसे मामा बोला करते थे।

रिश्ते के मामा द्वारा एक अक्टूबर 2023 से 31 जनवरी 2024 तक पीड़िता का लैंगिक उत्पीड़न किया गया था। एक दिन पीड़िता के आठ वर्षीय भाई ने यह सब देख लिया था। उसने मां को सारी घटना की जानकारी दे दी थी।

मां द्वारा पीड़िता से प्यार से पूछने पर सब कुछ बता दिया गया था। एक फरवरी 2024 को घटना की रिपोर्ट महिला थाने में दर्ज कराई गई थी। पुलिस ने आरोपित के विरुद्ध लैंगिक उत्पीड़न तथा लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत प्राथमिकी की थी।

आरोपित को गिरफ्तार कर न्यायालय के आदेश पर जेल भेजा गया था। प्रकरण के सारे तथ्यों की सुनवाई और पर्याप्त साक्ष्यों के आधार पर अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश फ़ास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट (पाक्सो एक्ट) कमलेश जगदल्ला की अदालत ने आरोपित को धारा 376 क ख,376 (2) ढ तथा 376 (2)च तथा लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम की धाराओं के तहत दोषी पाया।

अदालत ने उक्त सभी धाराओं में आरोपित को मृत्यु पर्यंत आजीवन कारावास तथा 20-20 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड की राशि अदा नहीं करने पर आरोपित को एक-एक वर्ष अतिरिक्त कारावास की सजा भुगतनी होगी। पीड़िता को क्षतिपूर्ति के रूप में पांच लाख देने तथा अर्थदंड की राशि भी अपील नहीं होने की स्थिति में पीड़िता को देने का आदेश दिया गया है।
समाज में गलत संदेश जाएगा

अदालत ने कहा कि दंड का प्रश्न अत्यंत ही कठिन होता है। दंड अधिरोपित करते समय केवल अभियुक्त की उम्र या उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि के अवलंबन होने तक ही विचार योग्य नहीं होता है, बल्कि अपराध की प्रकृति एवं अपराध के परिणामस्वरूप आहत को आई शारीरिक या मानसिक पीड़ा और आहत एवं अभियुक्त का आपसी संबंध भी विचार योग्य होता है।

अभियुक्त के द्वारा पीड़िता के रिश्ते के मामा होते हुए 11 वर्ष आयु की पीड़िता के साथ उक्त अपराध कारित किया गया है, जो गंभीर प्रकृति का है। ऐसी स्थिति में अभियुक्त के दंड में नरमी दिखाए जाने से इसका समाज पर गलत संदेश जाएगा। अतः अपराध की गंभीरता एवं समाज पर पड़ने वाले प्रभाव को दृष्टिगत रखते हुए आरोपित को मृत्यु पर्यंत आजीवन कारावास व अर्थदंड की सजा सुनाई गई है।

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