छत्तीसगढ़

ब्लैकमेलिंग का खेल, आरक्षक से मांगे 1 लाख रुपये

Blackmailing game, demanded Rs 1 lakh from constable

बिलासपुर। बिलासपुर में पुलिस विभाग से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसमें एक आरक्षक से कथित रूप से जबरन वसूली करने और पुराना वीडियो वायरल करने की धमकी देने के आरोप में चार लोगों के खिलाफ अपराध दर्ज किया गया है। मामला सामने आने के बाद पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया है। घटना Bilaspur के सिविल लाइन थाना क्षेत्र की बताई जा रही है। पुलिस के अनुसार सिविल लाइन थाने के बाहर चाय दुकान संचालित करने वाले सोनू ठाकुर सहित चार लोगों पर यह आरोप है कि उन्होंने एक पुलिस आरक्षक से एक लाख रुपये की मांग की थी। आरोप है कि रकम नहीं देने पर एक साल पुराना वीडियो सोशल मीडिया में वायरल कर दिया गया।

जानकारी के मुताबिक वायरल किया गया वीडियो आरक्षक मनोज साहू का बताया जा रहा है, जिसमें वह थाना परिसर में सोते हुए दिखाई दे रहे हैं और उनके पास बीयर की बोतल भी नजर आ रही है। यह वीडियो करीब एक वर्ष पुराना बताया जा रहा है। शिकायत के अनुसार सोनू ठाकुर ने पहले आरक्षक को वीडियो दिखाकर एक लाख रुपये की मांग की। बाद में बातचीत के दौरान यह रकम घटाकर 50 हजार रुपये कर दी गई। लेकिन आरक्षक ने किसी भी प्रकार की राशि देने से इनकार कर दिया। इसके बाद वीडियो को सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया गया, जिससे मामला और गंभीर हो गया।

मामले की जानकारी मिलने पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक पंकज कुमार पटेल ने 6 जून को सोनू ठाकुर को पूछताछ के लिए बुलाया। पूछताछ के दौरान उसने कथित रूप से स्वीकार किया कि वह स्वयं को पत्रकार बताने वाले अनुज श्रीवास्तव और जिया खान के कहने पर आरक्षक से संपर्क में था। साथ ही उसने यह भी बताया कि सिरगिट्टी थाने में पदस्थ आरक्षक रितेश मिश्रा ने यह वीडियो उपलब्ध कराया था। पूरे मामले की जांच पूरी होने के बाद 8 जून को सिविल लाइन थाना पुलिस ने पीड़ित आरक्षक की शिकायत पर एफआईआर दर्ज कर ली। पुलिस ने आरक्षक रितेश मिश्रा, अनुज श्रीवास्तव, जिया खान और सोनू ठाकुर के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 308 के तहत मामला दर्ज किया है।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार यह मामला जबरन वसूली और अवैध दबाव बनाने से जुड़ा हुआ है, जिसकी विस्तृत जांच की जा रही है। वीडियो की सत्यता, प्रसारण के तरीके और इसमें शामिल सभी लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है। अधिकारियों ने बताया कि यदि जांच में और लोगों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित कर लिया गया है और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से भी जानकारी मांगी जा रही है। इस घटना ने पुलिस विभाग में भी चर्चा का विषय बना दिया है, क्योंकि मामला विभाग के ही एक आरक्षक से जुड़ा हुआ है। फिलहाल पुलिस सभी पहलुओं की जांच कर रही है और आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।

 

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