रायपुर। छत्तीसगढ़ भाजपा की नई प्रदेश प्रभारी स्मृति ईरानी के पहले दौरे का पहला दिन कई छोटी-छोटी घटनाओं के कारण चर्चा में रहा। एयरपोर्ट पर सीमित स्वागत, रास्ते में बैनर-पोस्टर का अभाव, बुके-गमछे लेने से इनकार और सेल्फी लेने की कोशिश कर रही कार्यकर्ता को ‘मन क
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के साथ जमीन पर बैठकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कार्यक्रम सुनने की तस्वीर भी चर्चा में रही। पहले दिन करीब 9 घंटे तक बैठकें चलीं। बैठकों में कुछ मंत्रियों को लेकर शिकायतें सामने आने की भी चर्चा रही।
1. सीमित स्वागत, न ढोल-ताशे और न पोस्टर
स्मृति ईरानी सुबह 8:50 बजे रायपुर एयरपोर्ट पहुंचीं। स्वागत के लिए संगठन के 16 नामित पदाधिकारी, महापौर और विधायक मौजूद थे। मंत्रियों को नहीं बुलाया गया। न ढोल-ताशे थे और न एयरपोर्ट से भाजपा कार्यालय तक बैनर-पोस्टर। स्मृति ने मीडिया से भी बातचीत नहीं की।
प्रदेश प्रभारी के पहले दौरे पर आमतौर पर स्वागत और शक्ति प्रदर्शन देखने को मिलता है। ऐसे में सीमित स्वागत को सादगी और तामझाम से दूरी के संकेत के रूप में देखा जा सकता है।
2. बुके-गमछे नहीं लिए, सेल्फी छोड़ ‘मन की बात’ सुनने कहा
प्रदेश कार्यालय में स्मृति ने बुके और गमछे स्वीकार नहीं किए। एक महिला कार्यकर्ता सेल्फी लेने पहुंची तो उन्होंने उसे ‘मन की बात’ सुनने जाने के लिए कहा।
राजनीतिक आयोजनों में स्वागत और तस्वीरें आम हैं, लेकिन इस घटना में प्राथमिकता कार्यक्रम को दी गई। इससे कार्यकर्ताओं को यह संकेत मिलता दिखा कि समय स्वागत-सत्कार में लगाने के बजाय संगठन के कार्यक्रमों में भागीदारी पर ध्यान देना चाहिए।
3. बीजेपी दफ्तर के भीतर पुलिस सुरक्षा हटाई
भाजपा कार्यालय परिसर के भीतर सुरक्षा के लिए बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात थे। बताया गया कि स्मृति ईरानी ने परिसर के भीतर से अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था हटवा दी। उनके साथ कोई बॉडीगार्ड या पीएसओ भी नजर नहीं आया। उन्होंने बिना किसी विशेष सुरक्षा घेरे के कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों के बीच समय बिताया।
स्मृति ईरानी ने बीजेपी कार्यालय परिसर स्थित स्मृति मंदिर में अटल बिहारी वाजपेयी, दीनदयाल उपाध्याय और राजमाता विजयाराजे सिंधिया को पुष्प अर्पित किए।
यह दौरे का औपचारिक हिस्सा था, लेकिन भाजपा की वैचारिक विरासत और संगठन निर्माण में योगदान देने वाले नेताओं के प्रति सम्मान भी दिखाता है।
4. मुख्यमंत्री को पहले बैठने कहा
भाजपा कार्यालय से स्मृति ईरानी और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय एक ही कार से अभनपुर रवाना हुए। कार में बैठते समय मुख्यमंत्री ने स्मृति को पहले बैठने के लिए कहा, लेकिन उन्होंने उन्हें पहले बैठने का इशारा किया और घुमकर खुद दूसरे दरवाजे से कार में बैठीं।
5. कार्यकर्ताओं के साथ जमीन पर बैठकर सुना कार्यक्रम
अभनपुर में ‘मन की बात’ सुनने के दौरान स्मृति ईरानी और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय कार्यकर्ताओं के साथ जमीन पर बैठे। यहां भी स्मृति ने अपने लिए अलग से मंच या विशेष व्यवस्था को प्राथमिकता नहीं दी। कार्यक्रम में कार्यकर्ताओं के साथ बैठकर प्रधानमंत्री का संबोधन सुनना उनके दौरे की सबसे स्पष्ट तस्वीरों में से एक रहा।
6. गेट पर रुकीं गाड़ियां, सूची में नाम होने पर ही प्रवेश
भाजपा कार्यालय में बैठकों के दौरान गाड़ियों को बाहरी गेट पर रोक दिया गया। नेताओं को पैदल अंदर जाना पड़ा और प्रवेश के लिए पंजीयन व सूची में नाम होना जरूरी था। मंत्री खुशवंत साहेब को भी नाम नहीं होने के कारण वापस जाना पड़ा।
वरिष्ठ नेताओं और मंत्रियों पर भी एक जैसी व्यवस्था लागू होने से संगठनात्मक अनुशासन का संकेत मिला। हालांकि, अब तक बीजेपी की ऐसी बैठकों में गेट पर रजिस्ट्रेशन जरूर होता था लेकिन सारे वीआईपी भीतर कार से ही जाते थे लेकिन इस बार कार मेन गेट से ही वापस भेज दिया गया।
7. मंच पर नहीं, पदाधिकारियों के बराबर बैठीं
प्रदेश कार्यालय में बैठकों के दौरान स्मृति ईरानी ने मंच पर बैठने के बजाय अपने लिए पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के बराबर स्तर पर कुर्सी रखवाई। बैठक में संगठन के अलग-अलग स्तर के पदाधिकारी शामिल हुए। इससे पहले उन्होंने संगठन महामंत्री कर्मवीर सिंह और सह-प्रभारी सिद्धार्थ शंभू से भी बातचीत की।
मंच और सामने बैठी पंक्तियों के बीच की दूरी राजनीतिक आयोजनों में अक्सर पद और हैसियत का प्रतीक बन जाती है। ऐसे में समान स्तर पर बैठना इस बात का संकेत माना जा सकता है कि चर्चा में केवल औपचारिक संबोधन नहीं, बल्कि संगठन के लोगों को सुनना और उनके साथ सीधे संवाद करना भी महत्वपूर्ण है।
8. करीब नौ घंटे बैठकें, 2028 के चुनाव पर भी चर्चा
पहले दिन स्मृति ईरानी ने प्रदेश पदाधिकारियों, संभाग और जिला प्रभारियों, जिला अध्यक्षों, पूर्व सांसदों-विधायकों और कोर ग्रुप के साथ अलग-अलग बैठकें कीं। बैठकों का सिलसिला करीब 9 घंटे चला।
सूत्रों के मुताबिक, चर्चा में संगठन को मजबूत करने, सरकारी योजनाओं को घर-घर तक पहुंचाने, पुराने नेताओं को साथ रखने और सरकार-संगठन के बीच समन्वय बढ़ाने पर जोर रहा। 2028 के विधानसभा चुनाव की तैयारी को लेकर भी चर्चा हुई।
लंबी बैठकों और अलग-अलग स्तर के नेताओं से बातचीत को संगठन की स्थिति समझने और आगे की रणनीति तय करने की कोशिश के रूप में देखा जा सकता है। यानी दौरे में प्रतीकात्मक सादगी के साथ संगठन के कामकाज पर भी ध्यान रहा।
9. मंत्रियों को लेकर शिकायतों की चर्चा
सूत्रों के मुताबिक, बैठकों में कुछ मंत्रियों को लेकर शिकायतें भी सामने आईं। बताया जा रहा है कि संबंधित मंत्रियों के साथ निर्धारित बैठक में इन मुद्दों पर बात की जा सकती है।
26 अक्टूबर को विधायकों, सांसदों, मंत्रियों, निगम-मंडल और आयोगों के अध्यक्षों-उपाध्यक्षों तथा विचार परिवार के प्रतिनिधियों के साथ बैठकें निर्धारित हैं।पहले दिन की बैठकों के बाद स्मृति देर रात भाजपा कार्यालय से रवाना हुईं। उस समय भी विशेष प्रोटोकॉल या वाहनों के बड़े काफिला नजर नहीं आया।
10. दौरे में मूणत और बृजमोहन सबसे ज्यादा साथ दिखे
एक और बात यह भी रही कि पूरे दौरे के दौरान पूर्व मंत्री राजेश मूणत और सांसद बृजमोहन अग्रवाल स्मृति ईरानी के साथ सबसे ज्यादा नजर आए। स्वागत से लेकर दौरे की विभिन्न गतिविधियों तक दोनों नेताओं की मौजूदगी प्रमुख रही। इसे प्रदेश भाजपा के वरिष्ठ नेताओं की सक्रियता और नई प्रदेश प्रभारी के साथ उनकी नजदीकी के संदर्भ में देखा जा सकता है।
