भोपाल। पश्चिम एशिया में बढ़ते युद्ध और ऊर्जा आपूर्ति पर मंडरा रहे संकट के बीच राजधानी भोपाल सहित प्रदेश के लाखों रसोई गैस उपभोक्ता एक नई डिजिटल समस्या से जूझ रहे हैं। तेल कंपनियों द्वारा लागू किया गया 25 दिन का अंतराल नियम कागजों पर पारदर्शिता और जमाखोरी रोकने के उद्देश्य से बनाया गया था, लेकिन व्यवहार में यह उपभोक्ताओं के लिए परेशानी का कारण बनता जा रहा है।
डिलीवरी की तारीख से जुड़ी गणना बढ़ा रही दिक्कत
गैस एजेंसियों और उपभोक्ताओं से मिल रही जानकारी के अनुसार नए नियम में एक सिलेंडर बुकिंग के बाद अगली बुकिंग के लिए 25 दिन का अंतराल अनिवार्य है। लेकिन इस अंतराल की गणना बुकिंग की तारीख से नहीं, बल्कि सिलेंडर की डिलीवरी की तारीख से की जा रही है।
इसी कारण समय पर बुकिंग करने वाले उपभोक्ता भी अगला सिलेंडर समय पर नहीं ले पा रहे हैं।
डिलीवरी में देरी से बढ़ रहा इंतजार
गैस एजेंसियों द्वारा सिलेंडर की डिलीवरी में होने वाली देरी भी समस्या को और गंभीर बना रही है। उदाहरण के तौर पर यदि किसी उपभोक्ता ने 20 फरवरी को गैस बुक की और एजेंसी ने सिलेंडर 26 फरवरी को पहुंचाया, तो सिस्टम के अनुसार अगली बुकिंग 24 मार्च से पहले संभव नहीं होगी।
इस स्थिति में उपभोक्ता को लगभग एक महीने तक इंतजार करना पड़ता है, जबकि देरी एजेंसी की होती है।
जरूरत के समय काम नहीं आता डिजिटल सिस्टम
मध्यमवर्गीय परिवारों में गैस की खपत अक्सर परिस्थितियों के अनुसार बदलती रहती है। घर में मेहमान आने, किसी कार्यक्रम या अन्य कारणों से कई बार सिलेंडर 22–23 दिनों में ही खत्म हो जाता है। ऐसे समय में उपभोक्ता मोबाइल एप या ऑनलाइन पोर्टल पर बुकिंग करने की कोशिश करते हैं, लेकिन उन्हें ‘अभी बुकिंग संभव नहीं’ का संदेश मिलता है। इससे लोगों में नाराजगी बढ़ रही है।
पारदर्शिता के नाम पर बढ़ी असुविधा
नागरिकों का कहना है कि पारदर्शिता और जमाखोरी रोकने के नाम पर लागू किया गया यह डिजिटल सिस्टम अब आम उपभोक्ता के लिए असुविधा का कारण बन गया है। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण पहले ही ऊर्जा और गैस की वैश्विक कीमतों में अस्थिरता बनी हुई है।
नियम में बदलाव की मांग
उपभोक्ता संगठनों का कहना है कि सरकार और तेल कंपनियों को इस व्यवस्था की समीक्षा करनी चाहिए। विशेषज्ञों के अनुसार अगली बुकिंग की गणना डिलीवरी की तारीख के बजाय बुकिंग की तारीख से की जानी चाहिए। साथ ही विशेष परिस्थितियों में उपभोक्ताओं को अतिरिक्त छूट देने की व्यवस्था भी होनी चाहिए।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में यह डिजिटल नियम लाखों परिवारों की रसोई पर भारी पड़ सकता है।
