मध्यप्रदेश

अतरैला पूछीं तालाबों पर अतिक्रमण की होड़, प्रशासन मौन — जलस्रोतों का अस्तित्व खतरे में

Atraila asked about the encroachment on ponds, but the administration remained silent – ​​the existence of water sources is in danger.

रीवा। शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक तालाबों पर कब्जे का खेल जारी है। अतरैला क्षेत्र सहित आसपास के गांवों में तालाबों की भूमि पर खुलेआम अतिक्रमण हो रहा है, पर शासन-प्रशासन मौन है।

स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, कई प्रभावशाली लोगों ने तालाबों की मेड़ों को समतल कर वहां पक्के मकान खड़े कर लिए हैं। कुछ ने तो इन मकानों को किराए पर देकर निजी कमाई का जरिया बना लिया है। प्रशासन को इसकी जानकारी होने के बावजूद न तो नोटिस दिए जा रहे हैं और न ही कोई कार्रवाई की जा रही है।

पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि तालाबों के अतिक्रमण से जलभराव खत्म हो गया है और कई स्थानों पर जलस्रोत पूरी तरह सूख चुके हैं। यही नहीं, बरसात में जलनिकासी बाधित होने से आसपास के इलाकों में जलभराव और गंदगी की समस्या बढ़ गई है।

अतरैला ग्राम पंचायत सहित कई क्षेत्रों में सरकारी जमीन पर निर्माण कार्य तेजी से जारी हैं। बावजूद इसके, प्रशासन की चुप्पी सवालों के घेरे में है।

अब बड़ा सवाल यही है — क्या प्रशासन इन तालाबों को अतिक्रमण से मुक्त कराने की हिम्मत जुटाएगा, या फिर ये जलस्रोत विकास के नाम पर धीरे-धीरे इतिहास बनते चले जाएंगे?

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