छत्तीसगढ़

फिटनेस जांच के नाम पर मनमानी वसूली, 800 की जगह 5 हजार

Arbitrary charges under the guise of fitness inspections: 5,000 instead of 800.

रायपुर। मटियारी-बेलतरा बाईपास स्थित निजी वाहन फिटनेस सेंटर में व्यावसायिक वाहनों की जांच की प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं। मौके पर एक वाहन की फिटनेस जांच 7 से 8 मिनट में पूरी होती दिखी। जांच के बाद बाहर निकली एक बस गेट पर दस्तावेज लेते समय बंद हो गई।

चालक के दोबारा स्टार्ट करने की कोशिश के बावजूद इंजन चालू नहीं हुआ। आखिरकार लोगों को धक्का लगाकर बस हटानी पड़ी। सेंटर के बाहर सुबह से व्यावसायिक वाहनों की कतार लगी थी। कई वाहन मालिक फिटनेस जांच से पहले ट्रक और बसों के इंडिकेटर, हेडलाइट और दूसरी लाइटों की कमियां ठीक कराते दिखे। कहीं रेडियम पट्टी भी चिपकाई जा रही थी। कमियां ठीक होने के बाद वाहनों को जांच के लिए अंदर भेजा जा रहा था।

ढाई साल पहले निजी संस्था को सौंपी व्यवस्था: करीब ढाई साल पहले तक व्यावसायिक वाहनों की फिटनेस जांच आरटीओ परिसर में होती थी। बाद में यह व्यवस्था निजी संस्था रोविंग आई सिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड को सौंप दी गई। इसके बाद फिटनेस सेंटर मटियारी-बेलतरा बाईपास पर स्थानांतरित कर दिया गया। अब वाहन मालिकों को लगरा स्थित आरटीओ कार्यालय से करीब पांच किलोमीटर दूर इस सेंटर तक जाना पड़ता है।

29 बिंदुओं की जांच 7-8 मिनट में कैसे?

बिलासपुर बस मालिक परिवहन संघ के महासचिव नितिन जुनेजा ने कहा कि फिटनेस जांच निजी हाथों में जाने के बाद वाहन मालिकों की परेशानी बढ़ी है। कुछ लोग संपर्कों के जरिए जल्दी काम करा लेते हैं, जबकि दूसरे वाहन चार-चार घंटे खड़े रहते हैं। इससे वाहन मालिकों को नुकसान होता है।

उन्होंने बताया कि फिटनेस के दौरान करीब 29 बिंदुओं की जांच होनी होती है। नियमों के तहत व्यावसायिक वाहनों की फिटनेस जांच में ब्रेक, सस्पेंशन, स्टीयरिंग, लाइट, उत्सर्जन मानक, टायर और दूसरे सुरक्षा उपकरणों की स्थिति देखना जरूरी है।

संबंधित श्रेणियों में स्पीड गवर्नर और जीपीएस उपकरण की जांच भी आवश्यक हो सकती है। मौके पर 7 से 8 मिनट में जांच पूरी होते दिखने से सवाल उठता है कि सभी जरूरी तकनीकी बिंदुओं की जांच किस तरह की जा रही है। इसकी वास्तविक स्थिति जांच के रिकॉर्ड और प्रक्रिया की पड़ताल से स्पष्ट होगी।

सरकारी फीस 800 रुपए, 5 हजार तक वसूलने के आरोप

फिटनेस कराने आए कुछ वाहन मालिकों ने आरोप लगाया कि 800 रुपए की निर्धारित सरकारी फीस वाले काम के लिए करीब 5 हजार रुपए तक मांगे जाते हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। सेंटर के बाहर एजेंटों की सक्रियता भी दिखी, जबकि दलालों के प्रवेश पर प्रतिबंध का आदेश बताया जा रहा है। वाहन मालिकों के मुताबिक, आरटीओ कार्यालय के पास एजेंटों के जरिए बातचीत के बाद उन्हें सेंटर भेजा जाता है।

सेंटर प्रबंधन का दावा- जांच सही तरीके से होती है

फिटनेस सेंटर के मैनेजर नवीन ने बताया कि एक वाहन की जांच 7 से 8 मिनट में हो जाती है। उनके अनुसार, जांच सही तरीके से होती है और जांच क्षेत्र में किसी को प्रवेश नहीं दिया जाता। सेंटर में 36 कैमरों से निगरानी की जाती है। ड्राइवरों के लिए पीने के पानी और बैठने की व्यवस्था भी है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button