जवा जनपद अंतर्गत सितालहा उत्कृष्ट विद्यालय में मनमानी नियुक्ति! प्राचार्य और बाबू के रिश्तेदारों को दी प्राथमिकता, योग्य अभ्यर्थी को किया दरकिनार..
Arbitrary appointments at Sitalaha Excellence School in Jawa district! Priority was given to relatives of the principal and clerk, while qualified candidates were sidelined.

रीवा मप्र रिपोर्टर सुभाष मिश्रा
रीवा। जवा तहसील के शासकीय उत्कृष्ट उच्चतर माध्यमिक विद्यालय सितालहा में अतिथि शिक्षक की नियुक्ति प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि विद्यालय प्रबंधन ने पारदर्शिता को दरकिनार करते हुए प्राचार्य और बाबू के सगे संबंधियों को प्राथमिकता दी, जबकि एलाटमेंट के बावजूद एक योग्य अभ्यर्थी को ज्वाइनिंग से वंचित कर दिया गया।
मिली जानकारी के अनुसार, दीपक पाण्डेय पिता लालता प्रसाद पाण्डेय, निवासी ग्राम खाझा, तहसील जवा को अतिथि शिक्षक वर्ग-2 (विषय – हिंदी) में 23 जुलाई 2025 को पोर्टल के माध्यम से शासकीय उत्कृष्ट विद्यालय सितालहा में एलाटमेंट प्राप्त हुआ था। दीपक पाण्डेय ने नियमानुसार ज्वाइनिंग रिक्वेस्ट लेकर विद्यालय पहुंचे, लेकिन वहां पदस्थ सहायक ग्रेड-3 प्रदीप सिंह ने अभद्र व्यवहार करते हुए उन्हें लौट जाने को कह दिया।
जब अभ्यर्थी ने विद्यालय के प्राचार्य से मिलने का प्रयास किया, तो पहले तो यह कहकर टाल दिया गया कि “आज व्यस्त हूं, कल आना।” अगले दिन फिर “जिला शिक्षा अधिकारी से राय लेने” की बात कहकर ज्वाइनिंग नहीं कराई गई। 26 जुलाई 2025 को जब दीपक पाण्डेय पुनः विद्यालय पहुंचे, तो प्राचार्य ने यह कहकर मना कर दिया कि “विद्यालय में छात्र संख्या कम है, इसीलिए नियुक्ति संभव नहीं।”
हालांकि कुछ ही दिनों बाद सहायक ग्रेड-3 प्रदीप सिंह की पत्नी की अतिथि शिक्षक पद पर नियुक्ति कर दी गई। विशेष बात यह है कि दीपक पाण्डेय का स्कोर कार्ड 206.57 था, जबकि नियुक्ति पाने वाली प्रदीप सिंह की पत्नी का स्कोर केवल 176 था।
इस प्रकरण से विद्यालय की नियुक्ति प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। बताया जा रहा है कि प्राचार्य पहले भी अपने सगे संबंधियों की नियुक्ति विद्यालय में करवा चुके हैं। वहीं प्रार्थी दीपक पाण्डेय ने पूरे मामले की शिकायत जिला कलेक्टर रीवा से करते हुए निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग की है।
स्थानीय शिक्षा जगत में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है — क्योंकि यह सवाल उठाता है कि जब पारदर्शी ऑनलाइन एलाटमेंट व्यवस्था के बावजूद “संबंध और दबाव” नियुक्ति के मानदंड बन जाएं, तो योग्य अभ्यर्थियों के साथ न्याय कौन करेगा?



