केशकाल @ रूपेंद्र कोर्राम। शनिवार बस्तर आदिवासी समुदाय में एक अलग ही परम्परा है जिसमें अपने पेन पुरखाओं को सुमरन अर्पित करके ही हर काम को किया जाता है। केशकाल गौरगांव से 5 कि.मी.और टाटामारी के नीचे घना जंगल के बीच घनसा घाट में सोरी परिवारो के पेन पुरखा गढ़ हिंगजाजिन माता के दर में भादो जात्रा मनाया जायेगा । जिसमें आस पास के सभी सोरी परिवारों के साथ साथ बड़ी मात्रा में श्रद्धालुओं के भीड़ एकत्र होने वाली है।
केशकाल, कांकेर ,धमतरी,विश्रामपुरी से गांव गांव से तेल हल्दी ल कर दलहाजिन माता में रवानगी होना हैं। मनुष्य के जीवन में तीन संस्कार बहुत ही महत्वपूर्ण होता है जन्म/छठी,विवाह, मरण संस्कार वैसे ही आदिवासी पेन पुरखाओं में होता है तीन पीढ़ी के बाद पुराने चोला को बदल कर ,महला ,छठी बरी ,देव जात्रा कर नया पेन पुरखा अगवान पीला पाट के देव मिलन कार्यक्रम संपन्न होना है हर वर्ष भादो मास के कृष्ण पक्ष में भंगा राम जात्रा सम्पन होता है बंगाल देश से आई देवी भंगाराम को घनसा घाट के देवी देवताओं ने जगह प्रदान किए है इसलिए इस बार घनसा घाट में पहले भादो जात्रा किया जाएगा।केशकाल 12 मोड़ के बीच सजा वृक्ष में बैठा घाट के मालिक घाट राव और घाट के सभी पेन पुरखाओं को पूजा अर्चना करने से प्रकृति संतुलन बना रहता है वा बाहरी प्रकोप रहू बतास से सुरक्षित रखते है। घनसा घाट के देव समिति के अध्यक्ष श्री करण सिंह सोरी उपाध्यक्ष घस्सू राम सोरी, सचिव जंगल राम सोरी ,जयलाल सोरी ,तुलसी सोरी, छबि सोरी, शोभा राम सोरी, बासी सोरी समस्त सोरी परिवार व श्रद्धालु उपस्थित होंगे।
