रीवा में अन्नपूर्णा मेडिकल स्टोर सीज : वायरल वीडियो ने मचाया हड़कंप

Annapurna Medical Store seized in Rewa: Viral video creates panic

रीवा मप्र रिपोर्टर सुभाष मिश्रा 

वीडियो में संचालक ने खोली थी डॉक्टरों की कमीशनखोरी की पोल — नकली व सस्ती दवाएं महंगे दामों पर बेचने की खुद की थी कबूली
रीवा शहर के प्रतिष्ठित अन्नपूर्णा मेडिकल स्टोर के संचालक का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया। वीडियो में संचालक ने मेडिकल व्यवसाय से जुड़े गहरे भ्रष्टाचार की परतें उघाड़ दीं।
वायरल वीडियो में संचालक ने न केवल डॉक्टरों द्वारा कमीशनखोरी के खेल का खुलासा किया, बल्कि खुद सस्ती दवाएं महंगे दामों पर बेचने और नकली दवा रखने की बात भी स्वीकार की। बयान के बाद से ही शहर में सनसनी फैल गई और स्वास्थ्य सेवाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठ खड़े हो गए।
प्रशासन की त्वरित कार्रवाई — मेडिकल स्टोर सीज, जांच शुरू
वीडियो वायरल होते ही कलेक्टर ने मामले को स्वतः संज्ञान में लेते हुए जांच टीम गठित करने के निर्देश दिए। टीम में तीन ड्रग इंस्पेक्टर, जिला स्वास्थ्य अधिकारी सहित कई प्रशासनिक अधिकारी शामिल किए गए।
जांच दल ने अन्नपूर्णा मेडिकल स्टोर पहुंचकर खरीदी-बिक्री के दस्तावेज जब्त किए और जांच पूरी होने तक दुकान को सील कर दिया।
जिला स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया कि वीडियो में की गई सभी बातों की सत्यता की जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि प्रारंभिक जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी।
लोकल सप्लाई से जुड़ा बड़ा नेटवर्क!
सूत्रों के अनुसार अन्नपूर्णा मेडिकल स्टोर से मेडिकल कॉलेज सहित अन्य सरकारी संस्थानों को दवाओं की आपूर्ति की जाती है। ऐसे में इस मामले के सामने आने के बाद कई बड़े नामों की भूमिका भी जांच के घेरे में आ सकती है।
शासन-प्रशासन में मचा हड़कंप
वीडियो के वायरल होते ही ड्रग विभाग, स्वास्थ्य विभाग और प्रशासनिक महकमा सक्रिय हो गया। टीम ने मौके पर पहुंचकर बयान दर्ज किए और साक्ष्य जुटाए।
अधिकारियों का कहना है कि “यह जांच सिर्फ एक दुकान तक सीमित नहीं रहेगी। जिन डॉक्टरों और दवा आपूर्तिकर्ताओं की भूमिका संदिग्ध मिलेगी, उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।”
जनता के सवाल — क्या सिर्फ एक दुकान सीज करने से होगी सफाई?
रीवा के नागरिकों ने सोशल मीडिया पर सवाल उठाए हैं कि क्या सिर्फ अन्नपूर्णा मेडिकल को सीज करना पर्याप्त है या फिर इस पूरे कमीशन और नकली दवा नेटवर्क की जड़ तक पहुँचना ज़रूरी है?
लोगों का कहना है कि जब तक “बड़ी मछलियाँ” पकड़ में नहीं आतीं, तब तक इस तरह की घटनाएँ रुकने वाली नहीं हैं।
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