जवा में खुलेआम शराब की पैकारी का आरोप, गांव-गांव पहुंच रही खेप

Allegations of rampant illicit liquor trading in Jawa; consignments reaching every village.

लोकेशन – रीवा मप्र रिपोर्टर सुभाष मिश्रा 

शराब दुकान से बाइक और सफेद चार पहिया वाहनों से सप्लाई का दावा; नशामुक्ति अभियान के बीच आबकारी-पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल

जवा। सरकार और पुलिस प्रशासन एक ओर नशे के खिलाफ लगातार अभियान चला रहा है, वहीं दूसरी ओर जवा क्षेत्र में शराब की कथित पैकारी को लेकर ग्रामीणों ने गंभीर सवाल उठाए हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि जवा बाजार में संचालित शराब दुकान से दिनभर बाइक और सफेद रंग की चार पहिया वाहनों के जरिए आसपास के गांवों और बस्तियों तक शराब पहुंचाई जा रही है। ग्रामीणों का दावा है कि यह गतिविधि खुलेआम चल रही है, लेकिन जिम्मेदार विभागों की ओर से प्रभावी कार्रवाई नजर नहीं आ रही।

ग्रामीणों के मुताबिक शराब की दुकान से कथित रूप से निकलने वाले वाहन क्षेत्र के अलग-अलग गांवों तक पहुंचते हैं। गांवों में शराब आसानी से उपलब्ध होने के कारण शाम होते ही कई स्थानों पर शराबियों का जमावड़ा लगने की शिकायत सामने आ रही है। लोगों का कहना है कि शराब की सहज उपलब्धता का सबसे ज्यादा असर युवा वर्ग पर पड़ रहा है।

 

नशे की आसान उपलब्धता ने बढ़ाई चिंता

 

ग्रामीणों का कहना है कि गांव और मोहल्लों में जब शराब आसानी से उपलब्ध हो जाती है तो युवाओं में नशे की प्रवृत्ति बढ़ने का खतरा रहता है। परिवारों के सामने भी इसका असर दिखाई दे रहा है। नशे की आदत से आर्थिक स्थिति बिगड़ने के साथ घरेलू विवाद और सामाजिक तनाव बढ़ने की शिकायतें भी सामने आती रही हैं।

 

लोगों का कहना है कि शाम ढलते ही कुछ सार्वजनिक स्थानों और गली-मोहल्लों में शराबियों का जमावड़ा लग जाता है। इससे महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को भी असहज स्थिति का सामना करना पड़ता है। ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि यदि शराब की पैकारी पर नियमों के तहत रोक है तो गांवों तक शराब की कथित सप्लाई कैसे पहुंच रही है?

 

नशे के साथ अपराध का खतरा भी

 

स्थानीय लोगों का कहना है कि नशे की हालत में होने वाले विवाद कई बार अपराध का रूप ले लेते हैं। शराब के नशे में मारपीट, गाली-गलौज और अन्य विवादों की घटनाएं सामने आने का दावा ग्रामीणों ने किया है। उनका कहना है कि नशे की सामग्री की उपलब्धता पर अंकुश लगाए बिना केवल जागरूकता अभियान चलाने से समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है।

 

अभियान चल रहे, लेकिन जमीन पर असर कितना?

 

शासन और प्रशासन द्वारा नशामुक्ति को लेकर जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। पुलिस भी समय-समय पर कार्रवाई का दावा करती है। इसके बावजूद ग्रामीणों का आरोप है कि जवा क्षेत्र में शराब की कथित पैकारी पर प्रभावी अंकुश नहीं लग पा रहा है। यही वजह है कि नशे के खिलाफ चल रहे अभियानों की जमीनी प्रभावशीलता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

 

जांच हुई तो सामने आ सकता है पूरा नेटवर्क

 

ग्रामीणों ने रीवा पुलिस अधीक्षक और आबकारी विभाग से जवा बाजार की शराब दुकान से गांवों तक होने वाली कथित सप्लाई की जांच कराने की मांग की है। लोगों का कहना है कि शराब ले जाने वाले वाहनों की निगरानी, बिक्री के रिकॉर्ड और संबंधित लाइसेंस की जांच की जाए तो स्थिति स्पष्ट हो सकती है।

 

ग्रामीणों ने मांग की है कि यदि जांच में नियमों का उल्लंघन या अवैध पैकारी सामने आती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही गांवों में शराब की अवैध बिक्री और सप्लाई पर स्थायी रोक लगाने के लिए नियमित निगरानी व्यवस्था बनाई जाए।

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